आगरा: आगरा कॉलेज के इंजीनियरिंग विभाग के कंप्यूटर साइंस के छात्रों ने स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सटीक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया है। छात्रों की इस टीम ने 'निदान एआई' (Nidan AI) नामक एक क्रांतिकारी सॉफ्टवेयर विकसित किया है, जो गंभीर बीमारियों की शुरुआती अवस्था में ही पहचान करने की क्षमता रखता है।
मशीन लर्निंग पर आधारित यह तकनीक चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि यह डॉक्टरों को कम समय में सटीक परिणाम देने में मदद करती है। इस नवाचार को वैश्विक स्तर पर भी बड़ी पहचान मिली है और हाल ही में इसे यूनाइटेड किंगडम के एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
तीन अलग-अलग मॉड्यूल्स और रोगों की पहचान की क्षमता
निदान एआई' प्रोजेक्ट को विशेष रूप से तीन महत्वपूर्ण मॉड्यूल्स में विभाजित किया गया है जो शरीर के विभिन्न अंगों की जांच करते हैं। पहला मॉड्यूल एमआरआई (MRI) स्कैन का विश्लेषण कर मस्तिष्क में ट्यूमर की स्थिति का पता लगाता है और प्रभावित ऊतकों को अलग-अलग रंगों के जरिए दर्शाता है ताकि डॉक्टर सर्जरी के दौरान सटीक निर्णय ले सकें।
दूसरा मॉड्यूल आंखों की रेटिना इमेज पर आधारित है जो डायबिटिक रेटिनोपैथी और ग्लूकोमा जैसी लगभग 14 प्रकार की बीमारियों की पहचान कर सकता है। वहीं तीसरा मॉड्यूल फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं जैसे टीबी और निमोनिया की पहचान करने के लिए इमेज सेगमेंटेशन तकनीक का प्रभावी ढंग से उपयोग करता है।
तकनीकी संरचना और सीएनएन एल्गोरिदम का सफल प्रयोग
इस एडवांस प्रोजेक्ट को बीटेक अंतिम वर्ष के छात्रों प्रशांत दीक्षित, राहुल दीक्षित और अनुश्री शर्मा ने तैयार किया है जिसमें एमटेक के छात्र देवांश शर्मा ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस तकनीक के पीछे कन्व्युलूशनल न्यूरल नेटवर्क (CNN) का हाथ है जो इमेज डेटा को सिस्टम में फीड करते ही उसका गहन विश्लेषण कर परिणाम देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग के मरीजों के डेटा पर समान रूप से प्रभावी है। इस पूरी प्रक्रिया को कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर डॉ. अनुज पाराशर के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न किया गया है।
डॉक्टरों के लिए सहायक और समय की बड़ी बचत
निदान एआई का प्राथमिक उद्देश्य डॉक्टरों के काम को आसान बनाना और मरीजों को सस्ती व सुलभ जांच उपलब्ध कराना है। अक्सर जटिल स्कैन को पढ़ने और विश्लेषण करने में काफी समय लगता है, लेकिन यह एआई टूल कुछ ही सेकंडों में सटीक रिपोर्ट तैयार कर सकता है।
इससे न केवल इलाज समय पर शुरू हो सकेगा, बल्कि मानवीय त्रुटियों की संभावना भी न्यूनतम हो जाएगी। छात्रों ने इस प्रोजेक्ट के पेटेंट के लिए भी आवेदन किया है और भविष्य में इसे एक सफल स्टार्टअप के रूप में विकसित करने की योजना है ताकि आम जनता को इस आधुनिक तकनीक का सीधा लाभ मिल सके।