श्रीजी मंदिर के प्रांगण में जैसे ही गोस्वामी समाज ने ऊंचे झरोखों से लड्डुओं की बारिश शुरू की, पूरा मंदिर 'राधे-राधे' के जयघोष से गूंज उठा।

मथुरा : ब्रजमंडल की होली का वास्तविक रंग अब पूरी तरह से गहराने लगा है। बरसाना के ऐतिहासिक श्रीजी मंदिर में 'लड्डू होली' के भव्य आयोजन के साथ ही फाल्गुन मास के मुख्य रंगोत्सव का शंखनाद हो गया है। द्वापर युग की पौराणिक परंपराओं को जीवंत करते हुए, राधारानी के महल में न केवल अबीर और गुलाल की चादर बिछी, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं पर मन भर लड्डुओं की बौछार भी की गई। इस अलौकिक दृश्य का आनंद लेने और राधारानी के पावन प्रसाद को पाने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु बरसाना की गलियों मे पहुंचे हैं।

​5000 साल पुरानी 'लड्डू लीला' का इतिहास और महत्व
​बरसाना की लड्डू होली एक अनूठी परंपरा है जो सीधे द्वापर युग और भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी है। मान्यता है कि जब बरसाना की सखियां होली का निमंत्रण लेकर नंदगांव गई थीं और वहां से नंदबाबा ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया, तो उसकी खबर पंडा ने बरसाना पहुंचाई।

राधारानी के पिता वृषभान जी ने खुशी में पंडा को खाने के लिए लड्डू दिए। पंडा के पास गुलाल नहीं था, इसलिए उन्होंने अति-उत्साह में वे लड्डू ही वहां मौजूद गोपियों और लोगों पर फेंकने शुरू कर दिए, जो आज एक विश्व प्रसिद्ध परंपरा बन गई है।

​श्रीजी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब और भक्ति संगीत
​जैसे ही मंदिर के सेवायतों और गोस्वामी समाज ने ऊंचे झरोखों से श्रद्धालुओं पर लड्डू उछालने शुरू किए, पूरा मंदिर परिसर 'राधे-राधे' के जयघोष से गूंज उठा। भक्ति संगीत और ब्रज के लोकगीतों की धुनों पर हजारों श्रद्धालु घंटों झूमते रहे। हवा में उड़ते अबीर-गुलाल ने पूरे आसमान को सतरंगी कर दिया, जिससे हर भक्त भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।

​क्विंटलों में हुई लड्डुओं की वर्षा और भक्तों की अटूट श्रद्धा
​इस विशेष दिन पर मंदिर प्रशासन और सेवायतों द्वारा क्विंटलों के हिसाब से लड्डू तैयार किए जाते हैं। श्रद्धालु अपनी झोलियां और अंगोछे फैलाकर इन लड्डुओं को प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने के लिए लालायित दिखे। इन लड्डुओं को राधारानी की कृपा और ब्रज की मिठास का प्रतीक माना जाता है, जिसे पाने के लिए भक्त घंटों कतारों में खड़े रहे।

​लठमार होली की पूर्व संध्या पर भव्य आगाज
​लड्डू होली का यह भव्य उत्सव बरसाना की सुप्रसिद्ध 'लठमार होली' से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि अब ब्रज में होली का विधिवत निमंत्रण स्वीकार हो चुका है। लड्डू होली की मस्ती के बाद अब अगले दिन बरसाना की हुरियारिनें नंदगांव से आए हुरियारों पर प्रेम भरी लाठियां बरसाएंगी, जो ब्रज होली का सबसे आकर्षक हिस्सा है।

​सुरक्षा के कड़े इंतजाम और वैश्विक आकर्षण
​लाखों की भीड़ को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुआ। मंदिर की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई और भारी संख्या में पुलिस बल के साथ सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई। स्थानीय लोगों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों का उत्साह भी चरम पर था, जो ब्रज की इस प्राचीन संस्कृति और उल्लास को देखकर अभिभूत नजर आए।