​बांदा की विशेष अदालत ने 10 साल तक मासूम बच्चों का यौन शोषण करने और उनके 2 लाख से अधिक वीडियो 47 देशों में बेचने वाले जेई रामभवन और उसकी पत्नी को फांसी की सजा सुनाई है।

बांदा : उत्तर प्रदेश के बांदा की एक विशेष अदालत ने देश के सबसे वीभत्स और जघन्य चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए न्याय की मिसाल पेश की है। विशेष न्यायाधीश ने सिंचाई विभाग के तत्कालीन जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मासूम बच्चों के यौन शोषण और उनके अश्लील वीडियो अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने का दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है।

अदालत ने इस कृत्य को "अमानवीय और जघन्य" की श्रेणी में रखते हुए आदेश दिया कि दोनों दोषियों को तब तक फांसी के फंदे पर लटकाया जाए जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए, क्योंकि ऐसा अपराध समाज और कानून दोनों के लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

​इंटरपोल के इनपुट और सीबीआई जांच से हुआ खुलासा

​इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के गिरोह का भंडाफोड़ अक्टूबर 2020 में तब हुआ जब इंटरपोल ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को एक अत्यंत गोपनीय सूचना साझा की थी। सूचना में बताया गया था कि भारत के किसी सुदूर इलाके से बच्चों के यौन शोषण की सामग्री लगातार इंटरनेट पर अपलोड की जा रही है, जिसके बाद सीबीआई ने मामले की कमान संभाली और जांच के दौरान एक पेन ड्राइव बरामद की जिसमें 34 बच्चों के अश्लील वीडियो और सैकड़ों फोटो मिले थे।

विस्तृत जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मुख्य आरोपी रामभवन पिछले एक दशक यानी 2010 से 2020 के बीच इस घिनौने काम में सक्रिय था और उसने डार्क वेब के जरिए करीब 47 देशों के पीडोफाइल नेटवर्क को 2 लाख से अधिक वीडियो और फोटो बेचे थे।

​बच्चों को फंसाने का तरीका और पत्नी की आपराधिक संलिप्तता

​जेई रामभवन अपनी सरकारी हैसियत और संसाधनों का इस्तेमाल मासूम बच्चों को फुसलाने के लिए करता था और वह गरीब परिवारों के बच्चों को महंगे मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, घड़ियां और चॉकलेट जैसे प्रलोभन देकर अपने जाल में फंसाता था।

उसने चित्रकूट में एक कमरा किराए पर ले रखा था जहाँ वह इन मासूमों का यौन शोषण करता और उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग करता था, जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती इस पूरी साजिश में बराबर की भागीदार थी। दुर्गावती न केवल इन अपराधों की मूक गवाह थी बल्कि वह पीड़ितों को डराने-धमकाने और इस अवैध व्यापार के वित्तीय प्रबंधन में अपने पति की सक्रिय रूप से मदद करती थी।

​ऐतिहासिक आदेश

​सीबीआई ने फरवरी 2021 में इस मामले में एक पुख्ता चार्जशीट दाखिल की थी जिसमें आरोपियों के घर से बरामद लैपटॉप, मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों से मिले लाखों रुपये की अवैध कमाई के सबूतों को शामिल किया गया था। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 74 गवाहों को अदालत के समक्ष पेश किया जिनमें से कई पीड़ित बच्चों ने बंद कमरे में अपनी दर्दनाक आपबीती सुनाई और दोषियों की पहचान की।

विशेष अदालत ने 160 पन्नों के अपने विस्तृत फैसले में इस मामले को 'दुर्लभतम से दुर्लभ' माना और सरकार को आदेश दिया कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे के परिवार को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए।