लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर स्थित ऐतिहासिक 'लाल बारादरी' बिल्डिंग को लेकर तनाव चरम पर है। रविवार को समाजवादी छात्र सभा, NSUI और AISA के छात्रों ने बिल्डिंग के पास नमाज अदा की और शाम को इफ्तार किया। इसके विरोध में सोमवार को छात्रों का दूसरा गुट भी वहां पहुंच गया, जिससे स्थिति संवेदनशील हो गई है। परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
रविवार को इफ्तार और नमाज के बाद बढ़ा तनाव
विवाद की शुरुआत रविवार को हुई जब समाजवादी छात्र सभा, NSUI और AISA के छात्रों ने लाल बारादरी मस्जिद का दरवाजा बंद करने के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों ने पहले बैरिकेडिंग को गिराया और फिर बिल्डिंग के पास पहुंचकर नमाज पढ़ी और शाम को वहीं इफ्तार भी किया। इस दौरान हिंदू छात्रों ने नमाज पढ़ने वाले छात्रों के चारों ओर मानव श्रृंखला बना ली थी, जो नमाज खत्म होने के बाद ही हटी।
छात्रों के एक गुट ने की नारेबाजी, परिसर का माहौल हुआ तनावपूर्ण
सोमवार को विश्वविद्यालय के छात्रों का दूसरा गुट प्रदर्शनकारी छात्रों के पास पहुंच गया और 'जय भवानी' तथा 'जय श्री राम' के नारे लगाए। परिसर के अंदर माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। इससे पहले, रविवार को नमाज पढ़ने वाले छात्रों को हिंदू छात्रों ने मानव श्रृंखला बनाकर घेर लिया था और उनके उठने के बाद ही यह श्रृंखला हटी थी।
क्या है पूरा विवाद? ASI संरक्षित स्थल पर निर्माण का विरोध
विवाद तब शुरू हुआ जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने लाल बारादरी परिसर में फेंसिंग लगाने के लिए खुदाई शुरू की। NSUI और अन्य छात्र संगठनों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया कि लाल बारादरी एक ASI संरक्षित स्थल है, इसलिए बिना अनुमति के यहां कोई कंस्ट्रक्शन नहीं किया जा सकता। छात्रों का दावा है कि प्रशासन एक धर्म विशेष के लोगों की एंट्री रोकने के लिए पूरे परिसर को सील करने की कोशिश कर रहा है।
मंदिर-मस्जिद के दावों के बीच फंसा प्रशासन
लाल बारादरी बिल्डिंग के अंदर एक गुट मस्जिद होने का दावा कर रहा है, वहीं कुछ छात्रों का कहना है कि इसके अंदर एक छोटा मंदिर भी है। बिल्डिंग काफी जर्जर हो गई है, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन इसकी मरम्मत करा रहा है। छात्रों ने प्रशासन द्वारा मस्जिद के दरवाजे को बिना किसी नोटिस के सील करने और वहां दीवार खड़ी करने का भी आरोप लगाया है।
इमरान प्रतापगढ़ी ने जताई आपत्ति, कहा- नफरत की प्रयोगशाला न बने परिसर
इस विवाद के बीच कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि "विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर को नफरत की प्रयोगशाला न बनाए" और उस जगह को छात्रों के लिए वापस खोल दिया जाए।