Kanpur Kidney News: बीते दिनों सोशल मीडिया और मीडिया की सुर्खियों में एक 'दर्दभरी' कहानी छाई हुई थी। एक बेबस बेटा, जिसके पास कॉलेज की फीस भरने के पैसे नहीं थे और वह अपनी किडनी बेचने के लिए कानपुर के अस्पतालों के चक्कर काट रहा था।
आयुष नाम के इस छात्र ने दावा किया था कि पिता की मौत के बाद उसका परिवार दाने-दाने को मोहताज है और पढ़ाई पूरी करने के लिए उसके पास अंग बेचने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
इस कहानी ने पूरे देश की सहानुभूति बटोरी, लेकिन जैसे ही पुलिस और स्थानीय लोगों ने इसकी तहकीकात शुरू की, मासूमियत का यह नकाब उतर गया।
जो कल तक 'मजबूरी' लग रही थी, वह असल में गलत आदतों, फिजूलखर्ची और एक एयरहोस्टेस के प्यार में बर्बाद हुई जागीर की कहानी निकली।
डॉक्टर बनने का सपना
बिहार के बेगूसराय का रहने वाला आयुष एक संपन्न जमींदार परिवार का इकलौता चिराग था। उसके पिता राजेश चौधरी ने उसे डॉक्टर बनाने का सपना देखा था और लाखों खर्च कर विशाखापत्तनम के नामी संस्थान में दाखिला दिलाया था।
साल 2015 तक सब ठीक था, लेकिन पढ़ाई के दौरान ही आयुष का ध्यान भटक गया। वह पढ़ाई से ज्यादा दोस्तों की मंडली और ऐशो-आराम में डूब गया।
एयरहोस्टेस से प्यार, शादी और 15 बीघा जमीन की बर्बादी
विशाखापत्तनम में ही आयुष की मुलाकात यूपी की एक एयरहोस्टेस से हुई। यह मुलाकात प्यार में बदली और आयुष ने अपनी पढ़ाई और भविष्य को दरकिनार कर दिया। साल 2018 में वह उसे गांव लेकर आया और देवघर के मंदिर में शादी कर ली।
इस शादी और अपनी प्रेमिका के शौक पूरे करने के लिए आयुष ने पिता की मौत के बाद अपनी पुश्तैनी 15 बीघा जमीन को किस्तों में बेच दिया। जिसे उसने दुनिया के सामने 'गिरवी' बताया था, वह जमीन असल में उसने खुद अपनी मर्जी से बेची और पैसे उड़ाए थे।
तीन महीने में टूटा रिश्ता और शुरू हुआ झूठ का खेल
आयुष के गलत ट्रैक पर जाने का असर यह हुआ कि उसकी शादी महज तीन महीने में टूट गई और पत्नी उसे छोड़कर चली गई। इसके बाद आयुष पूरी तरह बेपरवाह हो गया। वह गांव में यह झूठ बोलता रहा कि वह बाहर पढ़ाई कर रहा है, जबकि वह पुश्तैनी संपत्ति बेचकर दोस्तों के साथ खर्चीली जिंदगी जी रहा था।
जब संपत्ति खत्म हो गई और घर से पैसे मिलना बंद हो गए, तब उसने 'किडनी बेचने' का यह इमोशनल ड्रामा रचा ताकि लोगों की सहानुभूति और आर्थिक मदद हासिल कर सके।
बेगूसराय में विधवा मां और गांव की नाराजगी
जब जांच बेगूसराय के औगान गांव पहुँची, तो वहां की तस्वीर और भी भयानक थी। आयुष की विधवा मां घर में अकेली और लाचार है। गांव वालों का कहना है कि आयुष ने अपनी अय्याशी में न केवल खानदानी जमीन बेची, बल्कि अपनी मां को भी अकेला छोड़ दिया।
अब आयुष पुलिस से यह गुहार लगा रहा है कि उसकी इस सच्चाई का पता उसकी मां को न चले, क्योंकि वह यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी।
कानपुर पुलिस के अनुसार, आयुष की 'किडनी बेचने' वाली कहानी के पीछे कोई बड़ा गिरोह नहीं, बल्कि उसका अपना बुना हुआ झूठ का जाल है। अब यह जांच का विषय है कि क्या उसने यह सब केवल सहानुभूति के लिए किया या इसके पीछे कोई और बड़ी साजिश थी।