संगम तट पर आग का तांडव: मकर संक्रांति से पहले माघ मेले में मची अफरा-तफरी, दर्जनों टेंट जलकर खाक

इस घटना ने मेला प्रशासन द्वारा किए गए सुरक्षा दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रयागराज : संगम नगरी प्रयागराज में आस्था के सबसे बड़े समागम 'माघ मेला' की शुरुआत से ठीक पहले त्रिवेणी तट पर आग का तांडव देखने को मिला है।
बुधवार को दोपहर के समय मेला क्षेत्र के त्रिवेणी मार्ग पर स्थित शिविरों और दुकानों में अचानक भीषण आग लग गई। कड़ाके की ठंड और संगम से आने वाली तेज बर्फीली हवाओं के बीच आग ने देखते ही देखते इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि इसकी लपटें और काला धुआं कई किलोमीटर दूर से ही आसमान में दिखाई देने लगा।
इस हादसे ने मकर संक्रांति के प्रथम मुख्य स्नान की तैयारियों के बीच प्रशासन और श्रद्धालुओं की धड़कनें तेज कर दीं।
शॉर्ट सर्किट और तेज हवाओं ने बढ़ाया आग का प्रकोप
हादसे की प्राथमिक जांच में आग लगने का मुख्य कारण बिजली की लाइनों में हुआ शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। त्रिवेणी मार्ग पर स्थित एक अस्थायी दुकान के बिजली बोर्ड में अचानक चिंगारी उठी जिसने पास में रखी ज्वलनशील सामग्री और टेंट के कपड़ों को अपनी चपेट में ले लिया।
संगम की रेती पर चलने वाली तेज हवाओं ने आग में घी का काम किया और देखते ही देखते आग एक टेंट से दूसरे टेंट तक फैलती चली गई। इस दौरान गैस सिलेंडरों के फटने की भी आशंका जताई गई थी जिसके कारण आसपास के शिविरों में ठहरे कल्पवासियों और श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई और लोग अपना कीमती सामान छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
दमकल विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन और भारी आर्थिक नुकसान
घटना की सूचना मिलते ही मेला क्षेत्र में तैनात फायर ब्रिगेड की आधा दर्जन से अधिक गाड़ियां और पीएसी के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे। दमकल कर्मियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया।
राहत की बात यह रही कि इस अग्निकांड में कोई जनहानि या शारीरिक चोट की खबर नहीं है लेकिन दुकानदारों और संस्थाओं को भारी आर्थिक क्षति पहुंची है।
कई दुकानदारों का पूरा स्टॉक जलकर राख हो गया है और श्रद्धालुओं के टेंट में रखा बिस्तर व राशन भी खाक हो गया है जिससे उनके सामने अब सिर छुपाने का संकट खड़ा हो गया है।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल और प्रशासन की सतर्कता
मकर संक्रांति के महापर्व से महज कुछ घंटे पहले हुई इस घटना ने मेला प्रशासन द्वारा किए गए सुरक्षा दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
माघ मेला जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां लाखों की भीड़ जुटती है वहां बिजली के तारों के खुले जाल और टेंटों के बीच पर्याप्त दूरी न होना इस हादसे का बड़ा कारण माना जा रहा है।
अग्निकांड के बाद जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस महानिरीक्षक ने मौके का मुआयना किया और बिजली विभाग को निर्देश दिए हैं कि पूरे मेला क्षेत्र की वायरिंग की दोबारा जांच की जाए। प्रशासन ने प्रभावित दुकानदारों को आश्वासन दिया है कि नुकसान का विधिवत आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कल्पवासियों में दहशत और आगे की चुनौतियां
इस भीषण अग्निकांड के बाद संगम तट पर रह रहे कल्पवासियों और साधु-संतों में दहशत का माहौल है। मेले के शुरुआती दौर में ही ऐसी घटना होने से सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है क्योंकि आने वाले दिनों में मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी जैसे बड़े स्नान पर्वों पर भीड़ कई गुना बढ़ जाएगी।
पुलिस प्रशासन ने अब हर सेक्टर में फायर वॉच टावरों की संख्या बढ़ाने और श्रद्धालुओं को अलाव व हीटर के इस्तेमाल के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अनहोनी को टाला जा सके।
