ममता कुलकर्णी किन्नर अखाड़े से निष्कासित: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर टिप्पणी पड़ी भारी, अखाड़े ने तोड़े सभी संबंध

ममता कुलकर्णी को दी गई सभी धार्मिक सुविधाएं और अधिकार भी वापस ले लिए गए हैं।
प्रयागराज : किन्नर अखाड़े ने अपनी महामंडलेश्वर और पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को अखाड़े से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह सख्त कदम उनके द्वारा ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणियों के बाद उठाया गया है।
अखाड़े के पदाधिकारियों का कहना है कि ममता कुलकर्णी ने सनातन धर्म की सर्वोच्च मर्यादाओं का उल्लंघन किया है और पूज्य संतों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस निष्कासन के साथ ही अब ममता कुलकर्णी का किन्नर अखाड़े से किसी भी प्रकार का कोई धार्मिक या आधिकारिक संबंध नहीं रह गया है।
शंकराचार्य के अपमान को अखाड़े ने बताया अक्षम्य अपराध
किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा कि अखाड़ा परंपरा में गुरुओं और शंकराचार्यों का स्थान सर्वोपरि होता है।
ममता कुलकर्णी ने जिस तरह से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की आलोचना की और उनके विरुद्ध बयानबाजी की, उससे पूरे संत समाज में रोष व्याप्त था।
अखाड़े का मानना है कि महामंडलेश्वर जैसे गरिमामयी पद पर रहते हुए इस तरह का आचरण अखाड़े की छवि को धूमिल करता है। अनुशासन बनाए रखने के लिए उन्हें तत्काल प्रभाव से पदमुक्त और निष्कासित करने का निर्णय लिया गया।
ममता कुलकर्णी के विवादित बयान और संत समाज का विरोध
ममता कुलकर्णी ने हाल ही में एक सार्वजनिक वीडियो के माध्यम से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की कार्यशैली और उनके बयानों पर तीखे सवाल उठाए थे।
उनके इस बयान को संत समाज ने 'सनातन परंपरा पर हमला' करार दिया। विशेष रूप से प्रयागराज माघ मेले और अन्य धार्मिक मुद्दों पर शंकराचार्य के स्टैंड का विरोध करना ममता के लिए भारी पड़ गया।
अखाड़े के अन्य सदस्यों ने भी सामूहिक रूप से उनके निष्कासन की मांग की थी, जिसके बाद अखाड़े की उच्चस्तरीय बैठक में यह अंतिम फैसला लिया गया।
ग्लैमर की दुनिया से आध्यात्म और फिर विवादों का सफर
90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने कुछ साल पहले ग्लैमर की दुनिया को पूरी तरह छोड़कर आध्यात्म का रास्ता चुना था। उन्हें किन्नर अखाड़े में शामिल कर महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई थी, जो उस समय काफी चर्चा का विषय रही थी।
हालांकि, उनके ऊपर पहले भी ड्रग तस्करी जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं, लेकिन धार्मिक पद पर रहते हुए यह उनका सबसे बड़ा विवाद बनकर उभरा है। अब अखाड़े से बाहर किए जाने के बाद उनकी धार्मिक पहचान पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
अखाड़े की छवि बचाने के लिए उठाया गया बड़ा कदम
किन्नर अखाड़ा, जो कि जूना अखाड़े के साथ मिलकर कुंभ और अन्य धार्मिक आयोजनों में शामिल होता है, अपनी पहचान और मर्यादा को लेकर बेहद संवेदनशील रहा है।
अखाड़े के नेतृत्व का कहना है कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति को अपने साथ नहीं रख सकते जो सनातन धर्म के स्तंभों यानी शंकराचार्यों का सम्मान करना न जानता हो। ममता कुलकर्णी को दी गई सभी धार्मिक सुविधाएं और अधिकार भी वापस ले लिए गए हैं।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर फिल्म जगत से आध्यात्म में आने वाली हस्तियों और उनकी धार्मिक गंभीरता पर बहस छेड़ दी है।
