फिल्म 'घूसखोर पंडत' पर ग्रहण: इंस्पेक्टर ने खुद वादी बनकर दर्ज कराई FIR; जातिगत अपमान और नफरत फैलाने पर पूरी टीम पर केस

पूरी टीम पर BNS की धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
लखनऊ: मनोरंजन के नाम पर सामाजिक मर्यादाओं को लांघने और जातिगत भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामले में लखनऊ पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार किया है।
नेटफ्लिक्स पर प्रस्तावित फिल्म “घूसखोर पंडत” के टाइटल और उसके कंटेंट को लेकर उपजे विवाद के बाद, पुलिस ने फिल्म के निर्देशक और पूरी टीम के खिलाफ हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया है।



प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की शांति और सौहार्द से खिलवाड़ करने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पंडित जी के सम्मान में मैदान में उतरी पुलिस; इंस्पेक्टर ने खुद दर्ज कराया मुकदमा
इस कानूनी कार्रवाई में सबसे खास बात यह रही कि हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने समाज में बढ़ते आक्रोश और अपमानजनक शब्दावली का संज्ञान लेते हुए खुद वादी बनकर एफआईआर दर्ज कराई है।
सोशल मीडिया पर फिल्म के प्रचार के दौरान जिस तरह की भाषा और शीर्षक का प्रयोग किया गया, उसे पुलिस ने सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा माना है।
BNS की संगीन धाराओं में FIR दर्ज; आईटी एक्ट के तहत भी कार्रवाई
हजरतगंज थाने में FIR नंबर 23/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसमें फिल्म के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और निर्माण से जुड़े अन्य सदस्यों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं में शिकंजा कसा है:-
धारा 196: जाति और धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच नफरत फैलाना।
धारा 299: किसी वर्ग की धार्मिक और जातिगत भावनाओं को जानबूझकर आहत करना।
धारा 352 व 353: सार्वजनिक शांति को भंग करने के इरादे से अपमानजनक कृत्य करना।
IT एक्ट धारा 66: डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करना।
जातिगत विद्वेष फैलाने और मर्यादा लांघने का आरोप
दर्ज शिकायत के मुताबिक, फिल्म का शीर्षक "घूसखोर पंडत" एक विशिष्ट समुदाय को अपमानित करने के उद्देश्य से रखा गया है। यह न केवल जातिगत विद्वेष पैदा करता है, बल्कि समाज के एक बड़े वर्ग की छवि को भी धूमिल करता है।
पुलिस का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसी सामग्री परोसना गलत है जो किसी की आस्था या सामाजिक पहचान पर चोट करती हो।
लखनऊ कमिश्नरेट ने इस मामले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति दोहराते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की बात कही है।
शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की कड़ी चेतावनी
पुलिस प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि किसी भी फिल्म, सीरीज या सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अगर शांति व्यवस्था को चुनौती दी गई, तो पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी। इस मामले में अब पुलिस फिल्म की स्क्रिप्ट और वितरण प्रक्रिया की भी बारीकी से जांच कर रही है।
हजरतगंज पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य समाज में यह संदेश देना है कि कानून की नजर में हर समुदाय का सम्मान सर्वोपरि है और इसके साथ खिलवाड़ करने वालों की जगह जेल की सलाखों के पीछे है।
