अयोध्या में रामलीला कलाकारों की हुई 'चांदी': दोगुना किया गया मानदेय; मंचन का बजट भी 40 लाख से बढ़ाकर हुआ 1 करोड़

बजट बढ़ने से अब रामलीला के डिजिटल प्रमोशन और विदेशी पर्यटकों के लिए बहुभाषी प्रस्तुतियों पर भी काम किया जा सकेगा।
अयोध्या: भगवान राम की नगरी अयोध्या में अब रामलीला का मंचन और भी भव्य और दिव्य नजर आएगा। प्रदेश की योगी सरकार ने अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने वाले रामलीला कलाकारों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है।
संस्कृति विभाग ने कलाकारों के मानदेय को दोगुना करने के साथ-साथ रामलीला के वार्षिक बजट में भारी बढ़ोतरी करते हुए इसे 40 लाख रुपये से सीधे 1 करोड़ रुपये कर दिया है।
इस फैसले से कलाकारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और रामलीला का स्तर भी वैश्विक होगा।
कलाकारों के पारिश्रमिक में ऐतिहासिक वृद्धि और नई श्रेणियां
योगी सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन कलाकारों को मिलेगा जो वर्षों से निष्ठा के साथ रामलीला का मंचन कर रहे थे। अब मुख्य और सहायक भूमिका निभाने वाले सभी पात्रों को पहले के मुकाबले दोगुना मानदेय दिया जाएगा।
संस्कृति विभाग ने कलाकारों की दक्षता, अनुभव और उनकी भूमिका की महत्ता के आधार पर नई श्रेणियां भी निर्धारित की हैं। इससे वरिष्ठ और प्रतिभावान कलाकारों को उनके हुनर का उचित सम्मान और पारिश्रमिक मिल सकेगा, जिससे युवा पीढ़ी भी इस कला की ओर आकर्षित होगी।
बजट में 60 लाख रुपये का बड़ा उछाल और आधुनिक सुविधाएं
अयोध्या में वर्ष भर चलने वाली रामलीला के लिए अब संसाधनों की कमी नहीं रहेगी। पूर्व में रामलीला मंचन के लिए वार्षिक बजट 40 लाख रुपये था, जिसे अब सरकार ने बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया है।
इस अतिरिक्त बजट का उपयोग रामलीला के मंच को आधुनिक बनाने, उच्च गुणवत्ता वाले साउंड सिस्टम, डिजिटल लाइटिंग और पात्रों के लिए सुंदर व पौराणिक वेशभूषा तैयार करने में किया जाएगा।
इसका उद्देश्य अयोध्या आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करना है।
वैश्विक स्तर पर अयोध्या की सांस्कृतिक ब्रांडिंग
अयोध्या अब केवल एक धार्मिक नगरी नहीं बल्कि एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन केंद्र बन चुकी है। ऐसे में सरकार का लक्ष्य रामलीला के माध्यम से भगवान राम के चरित्र को दुनिया के सामने और प्रभावी तरीके से पेश करना है।
बजट बढ़ने से अब रामलीला के डिजिटल प्रमोशन और विदेशी पर्यटकों के लिए बहुभाषी प्रस्तुतियों पर भी काम किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त करने से ही अयोध्या की प्राचीन कला और संस्कृति का संरक्षण संभव है।
