काशी की गरिमा से खिलवाड़ मंजूर नहीं: मणिकर्णिका घाट विवाद पर, बोले योगी - "साजिश हुई इसलिए मुझे खुद आना पड़ा"

अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को लेकर उठ रहे सवालों पर सीएम ने कड़ा रुख अपनाया।
वाराणसी: वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर ध्वस्तीकरण और पुनर्विकास कार्य को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी तनाव के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को अचानक काशी पहुंचे।
उन्होंने मणिकर्णिका घाट का स्थलीय निरीक्षण किया और उसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विरोधियों पर तीखा हमला बोला।
सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ लोग विकास कार्यों में अड़ंगा डालने और धर्मनगरी काशी की छवि को वैश्विक स्तर पर धूमिल करने की साजिश रच रहे हैं, जिसे कतई सफल नहीं होने दिया जाएगा।
विवाद की जड़: अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा और घाट का पुनर्विकास
मणिकर्णिका घाट विवाद उस समय गहराया जब पुनर्विकास प्रोजेक्ट के तहत कुछ निर्माण कार्यों को हटाया गया। सोशल मीडिया और राजनीतिक हल्कों में यह अफवाह फैली कि रानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा और घाट के ऐतिहासिक स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की जा रही है।
इस मुद्दे ने स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और विपक्ष को एकजुट कर दिया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया था। इसी विवाद को शांत करने और वास्तविकता बताने के लिए मुख्यमंत्री को खुद मोर्चा संभालना पड़ा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले योगी: "भ्रम फैलाना विकास विरोधी मानसिकता"
प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी का विकास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप हो रहा है। उन्होंने विरोधियों को निशाने पर लेते हुए कहा, "काशी को बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश रची गई।
मणिकर्णिका घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए काम हो रहा है, न कि किसी ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुँचाने के लिए।"
उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग पहले काशी की गंदगी और अव्यवस्था पर चुप थे, वे अब विकास को देखकर भ्रम फैला रहे हैं।
रानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर दी सफाई
अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को लेकर उठ रहे सवालों पर सीएम ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ किया कि रानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा बनाए गए मंदिरों और उनके योगदान का भाजपा सरकार जितना सम्मान करती है, उतना किसी ने नहीं किया।
उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी ऐतिहासिक या धार्मिक प्रतीक को हटाया नहीं जा रहा है, बल्कि उन्हें और अधिक भव्य और सुरक्षित स्वरूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास कार्यों के दौरान जनभावनाओं का पूरा ख्याल रखा जाए।
उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तरह मणिकर्णिका घाट का कायाकल्प भी काशी की गरिमा के अनुरूप होगा और यहा आने वाले शव यात्रियों व श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी।
विपक्ष और साजिशकर्ताओं को सख्त चेतावनी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में चेतावनी देते हुए कहा कि विकास कार्यों में बाधा डालने वाले और अफवाह फैलाने वाले तत्वों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा, "काशी बदल रही है और यह बदलाव कुछ लोगों को पच नहीं रहा है।
मणिकर्णिका घाट का विवाद खड़ा करना केवल एक बहाना है, असली मकसद काशी की बढ़ती लोकप्रियता को रोकना है।" उन्होंने जनता से अपील की कि वे किसी भी बहकावे में न आएं और प्रशासन का सहयोग करें।
काल भैरव मंदिर में हाजिरी और 'कोतवाल' का आशीर्वाद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी के कोतवाल कहे जाने वाले काल भैरव मंदिर भी पहुंचे। यहा उन्होंने बाबा काल भैरव की आरती उतारी और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

मंदिर के पुजारियों ने उन्हें अंगवस्त्र और प्रसाद भेंट किया। मुख्यमंत्री का काल भैरव दर्शन इस मायने में भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि काशी की मान्यता के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत यहाँ हाजिरी लगाकर ही की जाती है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन और भव्य स्वागत
काल भैरव मंदिर से निकलने के बाद सीएम योगी श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर बाबा विश्वनाथ का षोडशोपचार विधि से पूजन और जलाभिषेक किया। दर्शन के बाद उन्होंने परिसर का भ्रमण किया और वहां मौजूद श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया।

सीएम ने विश्वनाथ धाम की व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया और मंदिर प्रशासन को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सदैव तत्पर रहने के निर्देश दिए।
