मकर संक्रांति 2026: सीएम योगी ने गोरखनाथ मंदिर में चढ़ाई आस्था की पहली 'खिचड़ी', प्रदेशवासियों को दीं मंगलकामनाएं

सीएम योगी ने गोरखनाथ मंदिर में चढ़ाई आस्था की पहली खिचड़ी, प्रदेशवासियों को दीं मंगलकामनाएं
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​मकर संक्रांति के साथ ही गोरखनाथ मंदिर में महीने भर चलने वाले ऐतिहासिक 'खिचड़ी मेले' की शुरुआत भी हो गई है।

नेपाल राजपरिवार की परंपरा के साथ शुरू हुए इस उत्सव में लाखों श्रद्धालु हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बाबा गोरखनाथ से प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।

गोरखपुर : ​उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने आज मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर गोरखपुर के सुप्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ 'खिचड़ी' चढ़ाई।

युगों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए मुख्यमंत्री ने तड़के ब्रह्ममुहूर्त में गुरु गोरखनाथ की पूजा-अर्चना की और नेपाल राजपरिवार की ओर से आई खिचड़ी के बाद अपनी ओर से पहली खिचड़ी अर्पित की।

इस अवसर पर मंदिर परिसर 'जय गुरु गोरखनाथ' के उद्घोष से गुंजायमान रहा और कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा को खिचड़ी चढ़ाने के लिए कतारों में खड़े नजर आए।

​सदियों पुरानी परंपरा और नेपाल से गहरा नाता

​गोरखनाथ मंदिर में मकर संक्रांति पर खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता के अनुसार, नेपाल राजपरिवार और वहां की जनता गुरु गोरखनाथ को अपना आराध्य मानती है, इसीलिए सदियों से परंपरा चली आ रही है कि पहली खिचड़ी नेपाल नरेश की ओर से अर्पित की जाती है।

इसके पश्चात गोरक्षपीठाधीश्वर द्वारा खिचड़ी चढ़ाकर विधिवत उत्सव की शुरुआत की जाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर के गर्भगृह में विशेष अनुष्ठान संपन्न किया और भगवान शिव के अवतार माने जाने वाले गुरु गोरखनाथ से प्रदेश की समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की।

​मुख्यमंत्री का संदेश और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं

​पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व सूर्य देव के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जो अंधकार से प्रकाश और सकारात्मकता की ओर बढ़ने का संदेश देता है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि डबल इंजन की सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है और बाबा गोरखनाथ का आशीर्वाद सभी नागरिकों पर बना रहे। उन्होंने विशेष रूप से खिचड़ी मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगमता पर जोर दिया।

​खिचड़ी मेले में उमड़ा जनसैलाब और सुरक्षा व्यवस्था

​मकर संक्रांति के साथ ही गोरखनाथ मंदिर में महीने भर चलने वाले ऐतिहासिक 'खिचड़ी मेले' की शुरुआत भी हो गई है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा बिहार और पड़ोसी देश नेपाल से भी भारी संख्या में लोग यहाँ पहुँच रहे हैं।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन और जिला पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए हैं। पूरे मेला क्षेत्र को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात हैं। श्रद्धालुओं को ठंड से बचाने के लिए रैन बसेरों और अलाव की व्यवस्था की गई है ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को कोई असुविधा न हो।

​खिचड़ी का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में सिद्ध योगी गुरु गोरखनाथ जब ज्वाला देवी के दर्शन कर लौट रहे थे, तब उन्होंने यहीं अक्षय पात्र में खिचड़ी स्वीकार की थी, तभी से यह उत्सव मनाया जाता है।

सामाजिक रूप से यह पर्व ऊंच-नीच के भेदभाव को भुलाकर एकजुटता का संदेश देता है क्योंकि यहाँ राजा से लेकर रंक तक सभी एक ही भाव से बाबा को अपनी आस्था की खिचड़ी अर्पित करते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशाल स्तर पर खिचड़ी के लंगर की भी व्यवस्था की गई है

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