बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा: यूजीसी कानून और शंकराचार्य के अपमान को बताया वजह, ठुकरा दी PCS की कुर्सी

यूजीसी कानून और शंकराचार्य के अपमान को बताया वजह, ठुकरा दी PCS की कुर्सी
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अपने आवास के बाहर एक पोस्टर लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया, जिस पर 'यूजीसी हटाओ, देश बचाओ' और 'शंकराचार्य का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान' जैसे नारे लिखे थे।

2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अग्निहोत्री ने सरकार को ब्राह्मण विरोधी बताते हुए सवर्ण नेताओं पर भी निशाना साधा। उनके इस कदम से यूपी की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात 2019 बैच के पीसीएस (PCS) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।




अलंकार अग्निहोत्री ने अपना इस्तीफा राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी को ई-मेल के जरिए भेजा है। उन्होंने सरकार की नीतियों, विशेषकर नए यूजीसी (UGC) कानून 2026 और प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई बदसलूकी को अपने इस्तीफे का मुख्य कारण बताया है।

​यूजीसी कानून को बताया 'काला कानून'

​अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए नियमों (Promotion of Equity Regulations, 2026) पर तीखा हमला बोलते हुए इसे 'काला कानून' करार दिया है। उनका आरोप है कि यह कानून सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों के खिलाफ है और उन्हें एक तरह से 'स्वघोषित अपराधी' की श्रेणी में खड़ा कर देता है।

अग्निहोत्री के अनुसार, इस कानून के तहत बनने वाली 'समता समितियां' मेधावी छात्रों के खिलाफ फर्जी शिकायतों के आधार पर उनका भविष्य बर्बाद कर सकती हैं। उन्होंने मांग की है कि इस कानून को तत्काल वापस (Roll Back) लिया जाना चाहिए क्योंकि यह शैक्षणिक संस्थानों के वातावरण को प्रदूषित कर रहा है।

​शंकराचार्य के अपमान से आहत थे अग्निहोत्री

​इस्तीफे के पीछे का एक और बड़ा कारण प्रयागराज माघ मेले की घटना है। अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और बटुकों के साथ जो व्यवहार किया गया, वह असहनीय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संतों की चोटी पकड़कर उन्हें घसीटा गया और जूते-चप्पलों से मारा गया, जो सनातन धर्म और ब्राह्मण समाज का अपमान है। एक प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते वे इस तंत्र का हिस्सा बने रहने में खुद को असमर्थ महसूस कर रहे थे जहाँ धर्मगुरुओं का सम्मान सुरक्षित नहीं है।

​'ब्रह्मण विरोधी' होने का लगाया आरोप और नेताओं पर साधा निशाना

​इस्तीफा देने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सरकार को 'ब्राह्मण विरोधी' मानसिकता वाला बताया। उन्होंने सवर्ण समाज के सांसदों और विधायकों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आज के नेता 'कॉरपोरेट कर्मचारियों' की तरह व्यवहार कर रहे हैं और उनमें अपनी ही सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ बोलने का साहस नहीं है।

उन्होंने अपने आवास के बाहर एक पोस्टर लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया, जिस पर 'यूजीसी हटाओ, देश बचाओ' और 'शंकराचार्य का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान' जैसे नारे लिखे थे।

​कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?

​अलंकार अग्निहोत्री मूल रूप से कानपुर के रहने वाले हैं और 2019 बैच के तेजतर्रार पीसीएस अधिकारी माने जाते हैं। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट बनने से पहले वे लखनऊ में सहायक नगर आयुक्त के पद पर तैनात थे।

उन्होंने बीएचयू (BHU) से बी.टेक और एलएलबी की पढ़ाई की है और वे अमेरिका में भी काम कर चुके हैं। प्रशासनिक हलकों में उनकी पहचान एक स्पष्टवादी और नियमों के पक्के अधिकारी के रूप में रही है।

​प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल

​अलंकार अग्निहोत्री के इस कदम के बाद यूपी के प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज है। एक तरफ ब्राह्मण संगठनों ने उनके समर्थन में प्रदर्शन शुरू कर दिया है, तो दूसरी तरफ सरकार इस मामले को अनुशासनहीनता के रूप में देख रही है।

26 जनवरी को जहां पूरा देश गणतंत्र दिवस मना रहा था, वहीं एक सिटी मजिस्ट्रेट का यह 'क्रांतिकारी' इस्तीफा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि शासन उनके इस्तीफे को स्वीकार करता है या उन पर विभागीय कार्रवाई की गाज गिरती है।

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