आजम खां का 'जौहर' दांव: ट्रस्ट से सपरिवार इस्तीफा, अब बहन निकहत अफलाक के हाथों में होगी रामपुर के इस बड़े संस्थान की कमान

ट्रस्ट से सपरिवार इस्तीफा, अब बहन निकहत अफलाक के हाथों में होगी रामपुर के इस बड़े संस्थान की कमान
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​राजनीतिक विश्लेषक इस फेरबदल को आजम खां की एक सोची-समझी रणनीतिक के रूप में देख रहे हैं।

प्रशासन द्वारा ट्रस्ट की संपत्तियों और लीज को लेकर की जा रही लगातार कार्रवाई ने भी इस फैसले को अनिवार्य बना दिया था।

रामपुर :रामपुर की राजनीति के केंद्र रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां ने कानूनी चुनौतियों और जेल की सलाखों के पीछे से एक बड़ा फैसला लिया है।

उन्होंने अपने सपनों के प्रोजेक्ट 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट' को बचाने के लिए खुद, अपनी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ ट्रस्ट के सभी पदों से सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है।

अब इस ट्रस्ट के संचालन की पूरी जिम्मेदारी आजम खां की बहन निकहत अफलाक को सौंप दी गई है, जिन्हें ट्रस्ट का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

​ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल: परिवार की नई भूमिका

​जौहर ट्रस्ट के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए पूरी कार्यकारिणी को पुनर्गठित किया गया है। आजम खां की बड़ी बहन निकहत अफलाक को अध्यक्ष दिया गया है।

वहीं, आजम खां के बड़े बेटे मोहम्मद अदीब आजम, जो पहले केवल एक सदस्य के रूप में ट्रस्ट से जुड़े थे, उन्हें अब 'सचिव' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस बदलाव के जरिए आजम खां ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी गैर-मौजूदगी में भी संस्थान का काम नहीं रुकेगा।

​नई कार्यकारिणी का गठन: अपनों पर जताया भरोसा

​आजम खां ने ट्रस्ट के संचालन के लिए अपने सबसे भरोसेमंद करीबियों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया है:-

​निकहत अफलाक (बहन): अध्यक्ष

​मोहम्मद अदीब आजम (बड़ा बेटा): सचिव

​मुश्ताक अहमद सिद्दीकी: उपाध्यक्ष

​नसीर अहमद खां (सपा विधायक): संयुक्त सचिव

​जावेद उर रहमान खां: कोषाध्यक्ष

​कानूनी शिकंजा और प्रशासनिक कार्रवाई बना आधार

​आजम खां का यह फैसला सीधे तौर पर उन पर और उनके परिवार पर कसते कानूनी शिकंजे का नतीजा माना जा रहा है। जौहर ट्रस्ट पर वर्तमान में किसानों की जमीन कब्जाने समेत 30 से अधिक गंभीर मुकदमे लंबित हैं।

आजम खां, डॉ. तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम के जेल में होने के कारण जौहर यूनिवर्सिटी और रामपुर पब्लिक स्कूल जैसे संस्थानों के प्रशासनिक कामकाज में काफी अड़चनें आ रही थीं।

प्रशासन द्वारा ट्रस्ट की संपत्तियों और लीज को लेकर की जा रही लगातार कार्रवाई ने भी इस फैसले को अनिवार्य बना दिया था।

​रणनीतिक चाल: संस्थानों को कानूनी बाधाओं से बचाने की कोशिश

​राजनीतिक विश्लेषक इस फेरबदल को आजम खां की एक सोची-समझी रणनीतिक चाल के रूप में देख रहे हैं। खुद को और सक्रिय रूप से जेल में बंद परिवार के सदस्यों को ट्रस्ट से अलग कर, उन्होंने प्रशासन और अदालती कार्यवाही के बीच एक तकनीकी बचाव का रास्ता निकाला है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उनके परिवार की अनुपस्थिति में भी जौहर यूनिवर्सिटी और अन्य प्रोजेक्ट्स का कामकाज किसी कानूनी बाधा के बिना जारी रहे और ट्रस्ट की संपत्तियों पर मालिकाना हक का संकट कम किया जा सके।

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