हाईकोर्ट का कड़ा रुख: 'सही मेरिट लिस्ट के बिना नहीं होंगे दाखिले', CLAT UG 2026 के नतीजों में सुधार के आदेश

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेरिट लिस्ट का आधार पूरी तरह पारदर्शी और सही होना चाहिए।
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली 'कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट' (CLAT UG 2026) की मेरिट लिस्ट को लेकर एक ऐतिहासिक निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज को आदेश दिया है कि वह वर्तमान मेरिट लिस्ट को संशोधित करे। यह फैसला उन छात्रों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर आया है जिन्होंने उत्तर कुंजी में विसंगतियों को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
क्यों दिया हाईकोर्ट ने मेरिट लिस्ट सुधारने का आदेश?
इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में छात्रों ने CLAT 2026 की प्रारंभिक उत्तर कुंजी के कुछ सवालों को चुनौती दी थी। छात्रों का तर्क था कि कुछ प्रश्नों के उत्तर गलत दिए गए थे, जिससे उनकी रैंकिंग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
कोर्ट ने विशेषज्ञों की राय और साक्ष्यों को देखने के बाद माना कि उत्तरों में तकनीकी त्रुटि थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मेरिट लिस्ट का आधार पूरी तरह पारदर्शी और सही होना चाहिए, क्योंकि यह छात्रों के भविष्य और देश के प्रतिष्ठित लॉ कॉलेजों में प्रवेश का सवाल है।
कंसोर्टियम को निर्देश: दोबारा जारी करें सही रैंकिंग
न्यायालय ने 'कंसोर्टियम ऑफ NLU को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे विवादित प्रश्नों का पुनर्मूल्यांकन करें और उसके आधार पर नई मेरिट लिस्ट तैयार करें।
इसका सीधा अर्थ यह है कि अब CLAT UG 2026 की रैंकिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। कई छात्र जो पहले मेरिट से बाहर थे, वे अब दौड़ में शामिल हो सकते हैं, जबकि कुछ की रैंकिंग नीचे खिसक सकती है।
काउंसलिंग प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर
मेरिट लिस्ट में संशोधन के आदेश के बाद अब वर्तमान में चल रही या प्रस्तावित काउंसलिंग प्रक्रिया में देरी होने की संभावना है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नई और संशोधित सूची जारी नहीं हो जाती, तब तक कॉलेजों का आवंटन करना सही नहीं होगा। हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप से उन मेधावी छात्रों को न्याय मिला है जो केवल एक या दो गलत उत्तरों की वजह से पिछड़ रहे थे।
छात्रों और अभिभावकों में खुशी की लहर
हाईकोर्ट के इस फैसले का अभ्यर्थियों ने स्वागत किया है। सोशल मीडिया पर छात्रों का कहना है कि यह उनकी मेहनत और सच्चाई की जीत है।
अब सभी की निगाहें कंसोर्टियम की अगली आधिकारिक सूचना पर टिकी हैं कि वे कब तक संशोधित सूची वेबसाइट पर अपलोड करते हैं। इस फैसले ने यह भी साफ कर दिया है कि प्रवेश परीक्षाओं में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
