माघ मेला 2026: मकर संक्रांति से पहले ही उमड़ा जनसैलाब, 25 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई डुबकी

मकर संक्रांति से पहले ही उमड़ा जनसैलाब, 25 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई डुबकी
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​श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। 

सुरक्षा के लिए ड्रोन और भारी पुलिस बल तैनात है, जबकि कल्पवासियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।

प्रयागराज : ​मकर संक्रांति के आधिकारिक स्नान पर्व से पहले ही प्रयागराज का माघ मेला क्षेत्र श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से सराबोर हो गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य स्नान पर्व शुरू होने से पहले ही करीब 25 लाख श्रद्धालु मेला क्षेत्र में पहुँच चुके हैं।

संगम तट पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है और लोग कड़ाके की ठंड के बावजूद आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। प्रशासन ने इस भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

​श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग और परिवहन की विशेष सुविधा

​मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने व्यापक पार्किंग व्यवस्था की है। शहर के बाहरी इलाकों और मेला क्षेत्र के प्रवेश द्वारों पर बड़ी पार्किंग बनाई गई हैं ताकि यातायात बाधित न हो।

इसके अलावा, श्रद्धालुओं को पार्किंग स्थलों से मुख्य स्नान घाटों तक पहुँचाने के लिए शटल बसों और ई-रिक्शा का संचालन किया जा रहा है। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष परिवहन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

​घाटों पर सुरक्षा और बुनियादी ढांचों का विस्तार

​संगम और अन्य सहायक घाटों की लंबाई बढ़ाई गई है ताकि एक साथ लाखों लोग सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें। गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग और जाल लगाए गए हैं। साथ ही, महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम की संख्या में भी बढ़ोतरी की गई है।

पूरे मेला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था के लिए हजारों स्वच्छता कर्मियों को तैनात किया गया है और पर्याप्त संख्या में मोबाइल टॉयलेट्स लगाए गए हैं।

​स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा का कड़ा पहरा

​श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। मेला क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए की जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जगह-जगह अस्थायी अस्पताल और एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है।

डॉक्टरों की टीमें 24 घंटे अलर्ट मोड पर हैं ताकि ठंड या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण प्रभावित होने वाले श्रद्धालुओं को तुरंत इलाज मिल सके।

​कल्पवासियों और साधु-संतों का जमावड़ा

​मकर संक्रांति के स्नान के साथ ही मेले में कल्पवास की शुरुआत भी प्रभावी रूप से हो जाती है। देश के कोने-कोने से आए साधु-संतों ने अपने पंडाल स्थापित कर लिए हैं।

कल्पवासी जो एक महीने तक संयम और नियम के साथ यहा निवास करते हैं, उनके लिए प्रशासन ने बिजली, पानी और राशन की उचित आपूर्ति सुनिश्चित की है। शाम के समय गंगा आरती और संतों के प्रवचन मेले के आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक दिव्य बना रहे हैं।

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