69000 शिक्षक भर्ती: न्याय की गुहार लेकर 2 फरवरी से लखनऊ की सड़कों पर उतरेंगे अभ्यर्थी

2 फरवरी को होने वाले इस बड़े आंदोलन और विधानसभा घेराव की चेतावनी को देखते हुए लखनऊ प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे अभ्यर्थियों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
आगामी 2 फरवरी 2026 से प्रदेश भर के पीड़ित अभ्यर्थी राजधानी लखनऊ में जुटने जा रहे हैं। इस बार आंदोलन का स्वरूप काफी बड़ा होने वाला है, क्योंकि अभ्यर्थियों ने न केवल धरना प्रदर्शन बल्कि विधानसभा के घेराव की भी पूरी तैयारी कर ली है।
विधानसभा घेराव और निर्णायक आंदोलन की रणनीति
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात शासन तक पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है।
अब 2 फरवरी को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लखनऊ पहुंचेंगे और अपनी मांगों के समर्थन में विधानसभा का घेराव करेंगे। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे।
परिजनों का मिला साथ: घरों से बाहर निकलेंगे परिवार
इस आंदोलन की सबसे खास बात यह है कि इस बार केवल अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि उनके परिजन भी प्रदर्शन में शामिल होंगे।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी और कानूनी पेचीदगियों के कारण उनके परिवारों को भी मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। परिजनों के शामिल होने से इस प्रदर्शन के और अधिक उग्र और प्रभावी होने की संभावना जताई जा रही है।
आरक्षण और मेरिट सूची को लेकर मुख्य विवाद
विवाद की मुख्य जड़ भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों का कथित उल्लंघन और नई मेरिट सूची जारी करने की मांग है। अभ्यर्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए विसंगतियों को दूर किया जाए और योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र सौंपे जाएं।
इस मामले को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों के बावजूद अब तक अंतिम समाधान न निकलने से अभ्यर्थियों में भारी रोष है।
प्रशासनिक चुनौतियां और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
2 फरवरी को होने वाले इस बड़े आंदोलन और विधानसभा घेराव की चेतावनी को देखते हुए लखनऊ प्रशासन अलर्ट मोड पर है। विधानसभा और उसके आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है।
पुलिस और खुफिया विभाग आंदोलन की रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि राजधानी की कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
नियुक्ति की मांग पर अड़े अभ्यर्थी
आंदोलनकारियों का एक ही सुर है- "नियुक्ति पत्र नहीं तो घर वापसी नहीं"। अभ्यर्थियों का तर्क है कि कई वर्षों का कीमती समय इस भर्ती की भेंट चढ़ चुका है और अब उनकी सहनशक्ति जवाब दे गई है।
वे सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं ताकि हजारों परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
