यूजीसी समानता नियमों के खिलाफ आक्रोश: भाजपा नेता ने खून से लिखी पीएम मोदी को चिट्ठी, कानून को बताया 'विनाशकारी'

भाजपा नेता ने खून से लिखी पीएम मोदी को चिट्ठी, कानून को बताया विनाशकारी
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इस पत्र के माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस 'काले कानून' को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

भाजपा नेता जगदीश पचौरी ने यूजीसी के नए समानता नियमों के विरोध में पीएम मोदी को खून से पत्र लिखा है। उन्होंने इस कानून को सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य के लिए घातक बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।

आगरा : यूजीसी (UGC) के नए 'समानता नियमों' (Promotion of Equity Regulations, 2026) का विरोध अब भारतीय जनता पार्टी के भीतर से भी शुरू हो गया है।

आगरा के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व महानगर अध्यक्ष जगदीश पचौरी ने अपने साथियों के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से एक पत्र लिखा है।

इस पत्र के माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस 'काले कानून' को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। भाजपा नेता का कहना है कि यह नियम न केवल सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों के खिलाफ है, बल्कि यह समाज में भेदभाव और विद्वेष को भी बढ़ावा देने वाला है।

​खून से लिखे पत्र में जताया गहरा असंतोष

​जगदीश पचौरी ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में लिखा है कि यूजीसी द्वारा लाए गए ये नए नियम शैक्षणिक संस्थानों के माहौल को खराब कर देंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन नियमों के तहत सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों को निशाना बनाना आसान हो जाएगा और उनके खिलाफ फर्जी शिकायतों का अंबार लग सकता है।

भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि जब पूरी दुनिया में योग्यता को महत्व दिया जा रहा है, तब इस तरह के नियम छात्रों के मनोबल को तोड़ने का काम करेंगे।

​सामान्य वर्ग के भविष्य पर खतरे की चेतावनी

​भाजपा नेता ने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि ये नियम वापस नहीं लिए गए, तो इसका खामियाजा सामान्य वर्ग के करोड़ों युवाओं को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इन नियमों की आड़ में शिक्षण संस्थानों में 'समता समितियों' के नाम पर जो ढांचा खड़ा किया जा रहा है, वह असल में मेधावी छात्रों के करियर को तबाह करने का एक हथियार बन सकता है।

उन्होंने पीएम मोदी से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए इस कानून को निरस्त करने का निर्देश दें।

​भाजपा के भीतर उठने लगे विरोध के स्वर

​जगदीश पचौरी जैसे वरिष्ठ नेता का इस तरह खुलकर अपनी ही सरकार की संस्था के नियमों का विरोध करना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

हाल ही में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी इन्हीं नियमों के विरोध में इस्तीफा दिया था, और अब भाजपा के अंदरूनी हलकों से उठ रहे ये स्वर बताते हैं कि यूजीसी के नए नियम पार्टी के कोर वोट बैंक (सामान्य वर्ग) के बीच नाराजगी पैदा कर रहे हैं। विपक्ष भी इस मुद्दे को लपकने की तैयारी में है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

​क्या हैं यूजीसी के विवादित नियम?

​यूजीसी के इन नए नियमों को लेकर मुख्य विवाद 'डिस्क्रिमिनेशन' की परिभाषा और उसके तहत की जाने वाली दंडात्मक कार्रवाई को लेकर है। विरोध करने वालों का तर्क है कि ये नियम एकतरफा हैं और इनका दुरुपयोग सवर्ण समाज के छात्रों और शिक्षकों को प्रताड़ित करने के लिए किया जा सकता है।

जगदीश पचौरी ने अपने पत्र में साफ कहा कि वे किसी वर्ग के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन समानता के नाम पर किसी एक वर्ग के अधिकारों का हनन भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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