महाराष्ट्र सरकार ने 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026' विधानसभा में पेश किया है, जिसे शिवसेना (यूबीटी) ने समर्थन दिया है। इस कानून के तहत जबरन या लालच से कराए गए धर्मांतरण पर 7 साल की सजा और 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

मुंबई : महाराष्ट्र में जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए फडणवीस सरकार ने विधानसभा में नया 'धर्मांतरण विरोधी विधेयक 2026' पेश किया है। इस बिल की सबसे बड़ी खबर यह है कि विपक्षी दल शिवसेना (उद्धव गुट) ने भी इस कानून का समर्थन करने का ऐलान किया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में बिल की धाराओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि जबरन धर्मांतरण कराने वालों को अब 7 साल की कैद और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना होगा।

कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि लालच या दबाव में किए गए धर्मांतरण के आधार पर होने वाली शादियां अमान्य होंगी और ऐसे मामलों में बच्चों के धर्म को लेकर भी सख्त नियम तय किए गए हैं।

जबरन धर्मांतरण पर 7 साल की जेल और 5 लाख का जुर्माना 
​मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन को जानकारी दी कि इस कानून के तहत दंड के कड़े प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति या संस्था लालच देकर या डरा-धमकार किसी का धर्मांतरण कराती है, तो उसे अधिकतम 7 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

सरकार का तर्क है कि गैर-कानूनी तरीके से कराए गए धर्मांतरण को कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जाएगा और इसमें शामिल संस्थाओं पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

​अवैध धर्मांतरण पर आधारित विवाह होंगे निरस्त: बच्चों के अधिकारों पर बड़ा प्रावधान

विधेयक में सबसे महत्वपूर्ण पहलू विवाह और उत्तराधिकार से जुड़ा है। कानून के अनुसार, अवैध धर्मांतरण के आधार पर किए गए विवाह को निरस्त (Invalid) माना जाएगा। ऐसे विवाह से जन्म लेने वाले बच्चों के लिए नियम स्पष्ट किए गए हैं:- 

बच्चे का धर्म: बच्चे का धर्म वही माना जाएगा जो उसकी माँ का मूल (धर्मांतरण से पूर्व का) धर्म था।

संपत्ति का अधिकार: हालांकि, बच्चे को अपने पिता की संपत्ति में उत्तराधिकार का पूरा अधिकार मिलेगा।

कस्टडी और गुजारा भत्ता: संबंधित महिला पति से भरण-पोषण की मांग कर सकेगी और बच्चों की कस्टडी माँ के पास ही रहेगी।

​उद्धव गुट का समर्थन: हिंदुत्व की राजनीति में नए समीकरण? 
शिवसेना (यूबीटी) द्वारा इस बिल का समर्थन करना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उद्धव ठाकरे ने इस विधेयक को समर्थन देकर यह संकेत दिया है कि हिंदुत्व और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर उनकी पार्टी का रुख अब भी कड़ा है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस समर्थन का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य की सुरक्षा और नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए सभी दलों का एक साथ आना लोकतंत्र के लिए सुखद संकेत है।