एकनाथ शिंदे का बड़ा दांव: BJP और उद्धव ठाकरे दोनों हैरान, BMC पर सस्पेंस बढ़ा

एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) से हाथ मिला लिया है।
BMC Elections 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच चल रही खींचतान की चर्चाओं के बीच शिंदे ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने न सिर्फ भाजपा बल्कि उद्धव ठाकरे गुट को भी हैरानी में डाल दिया है। इस कदम के साथ ही आगामी नगर निगम राजनीति और बीएमसी को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।
कल्याण-डोंबिवली में MNS के साथ शिवसेना (शिंदे) की नई जुगलबंदी
एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) से हाथ मिला लिया है। यह वही निगम है, जहां शिंदे गुट ने पिछला चुनाव भाजपा के साथ मिलकर लड़ा था। अब इस नए गठबंधन से भाजपा इस नगर निगम में अकेली पड़ती नजर आ रही है।
कल्याण डोंबिवली महानगरपालिकेत शिवसेना, भाजप महायुती आणखी मजबूत झाली आहे. कल्याण डोंबिवली महापालिकेत महाराष्ट्र नवनिर्माण सेनेने महायुतीला आपला पाठिंबा जाहीर केला आहे. विकासाला आणि स्थिर सरकारला पाठिंबा देण्यासाठी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेनेचे अध्यक्ष मा. राजसाहेब ठाकरे यांचे तसेच… pic.twitter.com/CSgz8MbNQc
— Dr Shrikant Lata Eknath Shinde (@DrSEShinde) January 21, 2026
उद्धव ठाकरे को भी लगा बड़ा झटका
इस सियासी चाल से उद्धव ठाकरे की शिवसेना को भी करारा झटका लगा है। राज ठाकरे, जिन्होंने हाल ही में उद्धव ठाकरे के साथ एकजुटता के संकेत दिए थे, अब एकनाथ शिंदे के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं। इससे यह साफ हो गया कि ठाकरे परिवार के बीच संभावित एकता ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई।
नगर निगम में सत्ता का गणित कैसे बदला
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में कुल 122 सीटें हैं। चुनाव परिणामों में शिंदे गुट की शिवसेना को 53 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा ने 50 सीटों पर जीत दर्ज की। MNS के पास 5 पार्षद हैं, जिनका समर्थन अब शिंदे गुट को मिल चुका है। इस तरह एकनाथ शिंदे के पास कुल 58 पार्षदों का समर्थन हो गया है, जबकि मेयर बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 62 का है।
उद्धव गुट के पार्षदों पर भी नजर
सूत्रों के मुताबिक, एकनाथ शिंदे की शिवसेना अब उद्धव ठाकरे गुट के 11 पार्षदों को भी साधने की कोशिश में जुटी है। यदि इनमें से 4 पार्षद भी साथ आ जाते हैं, तो कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में भाजपा के बिना ही शिंदे गुट की सरकार बन सकती है।
भाजपा से दूरी बनाकर ताकत दिखाने की रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि MNS को साथ लेकर एकनाथ शिंदे भाजपा को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अकेले भी सत्ता संभालने में सक्षम हैं। यह कदम उनकी राजनीतिक मजबूती दिखाने और भविष्य की रणनीति को साफ करने की कोशिश माना जा रहा है।
श्रीकांत शिंदे के गढ़ में BJP की बढ़त से असहज शिंदे
कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र शिंदे परिवार का मजबूत गढ़ माना जाता है। एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे यहीं से सांसद हैं। ऐसे में शिंदे नहीं चाहते कि इस इलाके में भाजपा का प्रभाव ज्यादा बढ़े। यही वजह मानी जा रही है कि शिवसेना (शिंदे) यहां अपने दम पर सत्ता कायम करने की कोशिश कर रही है।
BMC चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक तापमान
कल्याण-डोंबिवली में बदले समीकरणों का असर सीधे मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों पर भी पड़ सकता है। एकनाथ शिंदे का यह कदम संकेत देता है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में और बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।
