Maharashtra civic polls: अंबरनाथ में बीजेपी से हाथ मिलाना पड़ा भारी, कांग्रेस ने सभी 12 पार्षदों को किया निलंबित, ब्लॉक कमेटी भी भंग

भारतीय जनता पार्टी के साथ स्थानीय स्तर पर गठबंधन करने कांग्रेस अपने 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया।
Maharashtra civic polls: महाराष्ट्र की राजनीति में अंबरनाथ नगर परिषद को लेकर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी के साथ स्थानीय स्तर पर गठबंधन करना कांग्रेस नेताओं को भारी पड़ गया। पार्टी नेतृत्व ने सख्त कदम उठाते हुए अंबरनाथ नगर परिषद के सभी 12 कांग्रेस पार्षदों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही ब्लॉक कांग्रेस कमेटी को भी भंग कर दिया गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने साफ कर दिया है कि बीजेपी के साथ किसी भी स्तर पर समझौता पार्टी की नीति के खिलाफ है और अनुशासन तोड़ने वालों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
अचानक बदले सियासी समीकरण
अंबरनाथ नगर परिषद में हालिया घटनाक्रम ने सभी दलों को चौंका दिया। भाजपा ने कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया। यह इलाका शिंदे गुट का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है और यहां से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे सांसद हैं।
स्थानीय स्तर पर बने इस अप्रत्याशित गठबंधन ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' के नाम से बना नया मोर्चा
बीजेपी और कांग्रेस के इस गठबंधन को 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' नाम दिया गया है। हालिया नगर परिषद चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, जिसके बाद सत्ता गठन के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हुई।
नगर परिषद चुनाव का गणित
- कुल सीटें: 60
- शिवसेना (शिंदे गुट): 27
- भाजपा: 14
- कांग्रेस: 12
- एनसीपी: 4
- निर्दलीय: 2
इसी अंकगणित के बीच भाजपा-कांग्रेस की साझेदारी से नगराध्यक्ष का चुनाव संभव हो सका।
शिंदे गुट में नाराजगी
इस गठबंधन के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) में भारी नाराजगी देखी जा रही है। गुट के नेताओं का कहना है कि वर्षों पुराना गठबंधन तोड़कर भाजपा ने कांग्रेस का साथ चुना, जो राजनीतिक रूप से चौंकाने वाला कदम है। विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने इसे “सिद्धांतों के खिलाफ गठबंधन” बताया।
भाजपा का पलटवार
भाजपा नेताओं ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सत्ता के लिए किसी भी तरह का समझौता करना गलत है। पार्टी का दावा है कि शिंदे गुट के साथ बातचीत की कोशिश की गई थी, लेकिन वहां से कोई ठोस पहल नहीं हुई।
फडणवीस ने कहा- कांग्रेस से दूरी जरूरी
मामले पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन पार्टी की नीति के खिलाफ है और अंबरनाथ में जो राजनीतिक स्थिति बनी है, उसे सुधारा जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में इस तरह के प्रयोग दोहराए नहीं जाएंगे।
