​सिर्फ नाम ही नहीं, SIR ने दिल भी जोड़े: राजस्थान में रह रहे बेटे का सुराग मिला और मंदसौर में गूंजी खुशियों की किलकारी

राजस्थान में रह रहे बेटे का सुराग मिला और मंदसौर में गूंजी खुशियों की किलकारी
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पुलिस प्रशासन की इस मानवीय पहल की पूरे मध्य प्रदेश में सराहना हो रही है।

राजस्थान में रह रहे विनोद को मतदाता सूची के लिए माता-पिता के आईडी की जरूरत पड़ी, जिससे उसका सुराग मिला और पुलिस की मदद से यह भावुक मिलन संभव हुआ।

मंदसौर: यह कहानी मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के खिलचीपुरा की है। साल 2003 में विनोद गैरी नाम का एक युवक अचानक अपने घर से लापता हो गया था। उस समय विनोद की उम्र महज 23 साल थी।

बताया जाता है कि विनोद ने अपने ही समाज की एक युवती से प्रेम विवाह किया था, जिसे उसके परिवार वाले स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। इसी पारिवारिक कलह और सामाजिक दबाव के कारण विनोद अपनी पत्नी को लेकर चुपचाप शहर छोड़कर चला गया।

उसने अपनी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी और घर वालों से सारे संपर्क तोड़ लिए, ताकि उसे ढूंढा न जा सके। उसके अचानक चले जाने से पूरे परिवार में कोहराम मच गया था।

पिता का साया उठा और मां ने 22 सालों तक आंखों में सजाए रखा इंतज़ार

विनोद के घर छोड़ने के कुछ ही समय बाद उसके पिता का दुखद निधन हो गया। घर की आर्थिक और मानसिक स्थिति खराब हो गई, लेकिन उसकी मां रामकन्या बाई ने हार नहीं मानी।

उन्होंने अपने बेटे की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाईं, रिश्तेदारों से पूछा और हर उस जगह गईं जहाँ विनोद के होने की संभावना थी। समय बीतने के साथ लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि विनोद अब इस दुनिया में नहीं रहा होगा, लेकिन एक मां का दिल यह मानने को तैयार नहीं था।

रामकन्या बाई हर दिन दरवाजे पर इस उम्मीद में टकटकी लगाए रहती थीं कि शायद कभी उनका लाल वापस लौट आए।

निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया ने दिखाया चमत्कार

इस बिछड़े परिवार को मिलाने में भारत निर्वाचन आयोग का Special Intensive Revision यानी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' अभियान सबसे बड़ा जरिया बना। दरअसल, विनोद राजस्थान के नागौर जिले में जाकर बस गया था और वहां एक निजी स्कूल में चपरासी की नौकरी करने लगा था।

वहां उसे सरकारी दस्तावेजों और मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने की आवश्यकता पड़ी। नियमों के अनुसार, नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया के दौरान उसे अपने माता-पिता के EPIC कार्ड नंबर की जरूरत थी। इसी एक दस्तावेजी जरूरत ने उस दीवार को गिरा दिया जो 22 सालों से खड़ी थी।

राजस्थान से मंदसौर तक जुड़ा संपर्क और पुलिस की सक्रियता

विनोद ने राजस्थान से मंदसौर की खिलचीपुरा पंचायत में फोन कर अपने माता-पिता के पुराने पहचान पत्रों का विवरण मांगा। जब यह जानकारी स्थानीय स्तर पर ग्राम कोटवार और पुलिस तक पहुंची, तो रामकन्या बाई को इसकी सूचना दी गई।

अपने बेटे का नाम सुनते ही मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत नई आबादी थाना प्रभारी कुलदीप सिंह राठौर को निर्देश दिए।

पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और राजस्थान पुलिस की मदद से विनोद का सटीक पता लगाया और उसे सुरक्षा के साथ मंदसौर आने का बुलावा भेजा।

थाने में दिखा ममता का समंदर, अब नाती-पोतों के साथ रहेगा परिवार

जब विनोद पुलिस थाने पहुंचा, तो वहां का नजारा देख हर किसी की आंखें नम हो गईं। 22 साल पहले जो युवक घर से गया था, वह अब 45 साल का अधेड़ व्यक्ति बन चुका था और उसके खुद के दो बच्चे थे।

अपनी बूढ़ी मां को देखते ही विनोद उनके चरणों में गिर पड़ा और मां ने उसे सीने से लगा लिया। विनोद ने बताया कि वह अपनी जिद और नाराजगी के कारण इतने साल दूर रहा, लेकिन अब वह अपनी मां को अकेला नहीं छोड़ेगा।

उसने अपनी मां से माफी मांगी और अब वह उन्हें भी अपने साथ राजस्थान ले जाने की तैयारी कर रहा है। पुलिस प्रशासन की इस मानवीय पहल की पूरे मध्य प्रदेश में सराहना हो रही है।


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