उज्जैन। शहर के त्रिवेणी हिल्स इलाके में दो मासूम बच्चों की मौत जहरीली गैस से हो गई है। जबकि तीन अन्य की हालत नाजुक बनी हुई है। जहरीली गैस से प्रभावित होने के बाद बीमार पड़ने की वजह से सभी बच्चों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने काफी प्रयास भी किया, लेकिन दो मासूमों को बचाया नहीं जा सका। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में शोक छा गया। प्रारंभिक जांच में कीटनाशक से बनी गैस को हादसे की वजह माना जा रहा है। तीन अन्य बच्चों का उपचार किया जा रहा है।
नानी के घर छुट्टियां बनीं हादसे की वजह
पुलिस के अनुसार, दोनों बहनें अपने बच्चों के साथ गर्मियों की छुट्टियां मनाने मायके आई थीं। करीब 10 दिन पहले सभी बच्चे उज्जैन पहुंचे थे और परिवार के साथ रह रहे थे। सोमवार रात सभी एक ही कमरे में सोए थे, जहां अनाज भी रखा हुआ था। मंगलवार सुबह जब बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ी तो परिजन घबरा गए। एक बच्ची के मुंह से झाग निकलने पर तुरंत अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान डेढ़ माह की त्रिशा ने दम तोड़ दिया। इसके बाद अगली सुबह 4 साल की अनिका की भी मौत हो गई।
कीटनाशक से बनी गैस, जिसने ले ली जान
जांच में सामने आया है कि जिस कमरे में परिवार सो रहा था, वहां बड़ी मात्रा में गेहूं रखा था। अनाज को सुरक्षित रखने के लिए उसमें कीटनाशक दवा मिलाई गई थी। संभावना है कि उसी दवा से जहरीली गैस बनी और पूरे कमरे में फैल गई। बंद कमरे में रातभर गैस जमा होने से सभी की तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टरों के अनुसार, सल्फास जैसी दवाएं गैस छोड़ती हैं, जो बेहद खतरनाक होती हैं। खासतौर पर छोटे बच्चों पर इसका असर जल्दी और गंभीर होता है। हालांकि, मौत की असली वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
2 बच्चे अस्पताल में भर्ती, एक इंदौर रेफर
घटना में अन्य तीन बच्चे भी गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। जिनमें जेनिशा की हालत ज्यादा खराब होने पर उसे इंदौर रेफर किया गया है। वहीं, रेहान और येशु का इलाज उज्जैन के अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। परिवार के सदस्य अस्पताल के बाहर चिंता में डूबे हुए हैं। बच्चों की हालत को लेकर सभी की दुआएं जारी हैं। प्रशासन भी इलाज में हर संभव मदद का भरोसा दे रहा है।
जांच जारी, सुरक्षा को लेकर चेतावनी
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और एफएसएल टीम भी मौके पर पहुंची है। घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है ताकि सही कारण सामने आ सके। परिजनों का कहना है कि उन्हें दवा के खतरों की पूरी जानकारी नहीं थी। यह हादसा लापरवाही और जागरूकता की कमी को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अनाज में कीटनाशक डालते समय सावधानी बेहद जरूरी है। बंद कमरों में ऐसी दवाओं का उपयोग जानलेवा साबित हो सकता है। यह घटना सभी के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज न करें।