नर्मदापुरम/छिंदवाड़ा। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के 'कॉलर वाली शान' का अंत किसी कुदरती हादसे में नहीं, बल्कि एक सोची-समझी खूनी साजिश के तहत हुआ। जंगल के भीतर छिपे अफीम के अवैध खेतों पर वन विभाग की नजर न पड़े और बैल के शिकार का हिसाब बराबर हो जाए, इसके लिए खूंखार बाघ को 'साइलेंट किलर' (यूरिया जहर) देकर मौत की नींद सुला दिया गया।
बदले की आड़ में 'अफीम' का खेल
छातीआम बीट के घने जंगलों में हुई इस वारदात के तार केवल एक किसान के गुस्से से नहीं, बल्कि इलाके में फल-फूल रहे अफीम के अवैध कारोबार से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो आरोपी उदेसिंग और उसके साथी इस दुर्गम इलाके में अफीम की खेती को छिपाकर रखे हुए थे। उन्हें डर था कि यदि बाघ की मौजूदगी के कारण वन विभाग की गश्त बढ़ी, तो उनके करोड़ों के अवैध धंधे की पोल खुल जाएगी। बाघ द्वारा बैल का शिकार किए जाने ने आरोपियों को 'हथियार' दे दिया और उन्होंने मुआवजे के बजाय बाघ को ही रास्ते से हटाने का खूनी रास्ता चुना।
यूरिया का 'डेथ ट्रैप' और आधी रात को दफन हुआ 'राज'
वारदात की पटकथा किसी थ्रिलर फिल्म जैसी है। मुख्य आरोपी उदेसिंग ने अपने मृत बैल के शरीर में यूरिया और कीटनाशक का घातक मिश्रण भर दिया। जैसे ही भूखा बाघ अपना शिकार खाने लौटा, वह इस जहरीले जाल में फंस गया। बाघ की मौत होते ही आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने के लिए उसे जमीन में गहरा दफन कर दिया। उन्हें लगा कि 'रेडियो कॉलर' वाला बाघ हमेशा के लिए दफन हो गया, लेकिन उसकी सैटेलाइट लोकेशन ने वन विभाग को सीधे मौत की कब्र तक पहुंचा दिया।
खाकी और वन अमले का 'मेगा ऑपरेशन'
जब बाघ की लोकेशन एक ही जगह 'फ्रीज' हो गई, तो सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की बफर टीम और पश्चिम वनमंडल की टीम ने मोर्चा संभाला। डॉग स्क्वॉड की तीखी नाक ने मवेशी के शव से कुछ ही दूरी पर दफन बाघ को ढूंढ निकाला।
इन चार चेहरों ने रची साजिश
वन विभाग ने इस मामले में उदेसिंग, बिसनलाल, मनोहर सिंग और कैलाल को सलाखों के पीछे भेज दिया है। इन पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
वहीं इस मामले में पश्चिम वनमण्डल अधिकारी साहिल गर्ग ने बताया कि पश्चिम क्षेत्र के वन मंडल अधिकारी साहिल गर्ग ने बताया कि जब सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की बफर टीम और पश्चिम वनमंडल की टीम रेडियो कॉलर वाले बाघ की लोकेशन ट्रेस कर रही थी। गुरुवार शाम से ही सांगाखेड़ा परिक्षेत्र में सर्चिंग जारी थी। शुक्रवार सुबह छातीआम बीट के पास एक मवेशी का शव मिला। संदेह होने पर जब डॉग स्क्वायड की मदद से छानबीन की गई, तो पास ही जमीन में दफनाया गया बाघ का शव बरामद हुआ।
पुलिस ने मुख्य आरोपी उदेसिंग को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की तो उसने चौंकाने वाले खुलासे किए आरोपी ने बताया कि कुछ दिन पहले बाघ ने उसके बैल का शिकार किया था। अपने नुकसान का बदला लेने के लिए उदेसिंग ने मृत बैल के शरीर में यूरिया नामक घातक कीटनाशक मिला दिया। जब बाघ दोबारा अपना शिकार खाने लौटा, तो जहरीला मांस खाने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। साक्ष्य मिटाने के लिए आरोपी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर बाघ को जंगल में ही दफना दिया था। वन विभाग ने इस मामले में उदेसिंग सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।