इंदौर। बिना वैध भवन अनुमति के संचालित निजी अस्पतालों का मामला अब कानूनी रूप से गंभीर मोड़ ले चुका है। इस मुद्दे पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के सामने चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि शहर में कम से कम 16 निजी अस्पताल ऐसे भवनों में चल रहे हैं, जिन्हें अस्पताल संचालन के लिए विधिवत स्वीकृति प्राप्त नहीं है।
जवाब दाखिल नहीं करने पर नाराजगी जताई
सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने की। अदालत ने इस बात पर असंतोष जताया कि संबंधित विभाग समय पर जवाब दाखिल नहीं कर पाए। विशेष रूप से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी द्वारा पूर्व निर्देशों के बावजूद स्पष्टीकरण पेश नहीं करने पर न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त की। सुनवाई के दौरान नगर निगम इंदौर की रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ अस्पताल ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं जिन्हें आवासीय या कोचिंग संस्थान के रूप में अनुमति दी गई थी।
आवासीय इमारतों में चल रहे हैं अस्पताल
इन भवनों में अस्पताल संचालन से जुड़े सुरक्षा मानकों, अग्नि सुरक्षा प्रावधानों और अन्य वैधानिक आवश्यकताओं का पालन नहीं किया गया। अदालत ने कुल 31 निजी अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अगली सुनवाई में सभी संबंधित पक्षों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को कहा गया है। हाईकोर्ट यह स्पष्ट करना चाहता है कि बिना उचित अनुमति स्वास्थ्य सेवाएं कैसे चल रही थीं और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अगली सुनवाई में पक्षों को मौजूद रहने को कहा
याचिकाकर्ता की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि कुछ अस्पताल कथित रूप से फर्जी या कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर संचालित हो सकते हैं, जिनमें नगर निगम तथा अग्निशमन विभाग की स्वीकृतियों का दुरुपयोग शामिल है। अदालत ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, अगली सुनवाई में सभी पक्षों को मौजूद करने को कहा है। इस मामले में अब अगली सुनवाई में प्रशासन और अस्पताल संचालकों के जवाब से आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।