गुना जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में जुड़वा शिशुओं की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। परिवार ने एफआईआर और सख्त कार्रवाई की मांग की, अस्पताल प्रबंधन ने जांच के आदेश दिए।

गुना। जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती तो जुड़वां शिशुओं की मौत हो गई है। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। मृत बच्चों के पिता पवन अहिरवार ने बताया कि उनकी पत्नी की डिलीवरी 22 फरवरी को हुई थी, जिसमें दो जुड़वां लड़कों का जन्म हुआ था। जन्म के बाद डॉक्टरों ने बच्चों की हालत गंभीर बताते हुए बेहतर देखरेख के लिए उन्हें विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई वार्ड में शिफ्ट कर दिया था।

दो दिन चले इलाज के बाद एक की हुई मौत
परिजनों को उम्मीद थी कि विशेषज्ञ देखरेख में उनके बच्चे स्वस्थ हो जाएंगे। लेकिन दो दिन चले इलाज के बाद एक नवजात की मौत हो गई। उस समय चिकित्सकों ने आश्वासन दिया कि दूसरा बच्चा सुरक्षित है। परिवार ने डॉक्टरों की बात पर भरोसा कर संयम बनाए रखा। गुरुवार शाम तक दूसरे बच्चे की तबीयत स्थिर थी।देखने पर उसे ज्यादा परेशानी नहीं महसूस हो रही थी। वह धीरे-धीरे सामान्य हो रहा था। 

खून चढ़ाने के बाद दी बच्चे की मौत की सूचना
इसी बीच डॉक्टरों ने उसे रक्त चढ़ाने का निर्णय लिया। परिजनों का दावा है कि खून चढ़ाने के कुछ समय बाद ही बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ गई और फिर उसकी मृत्यु की सूचना दे दी गई। इस घटनाक्रम ने परिवार को झकझोर कर रख दिया। उनका कहना है कि यदि बच्चे के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं थे, जैसा कि डॉक्टर बाद में कह रहे हैं, तो फिर रक्त चढ़ाने का फैसला क्यों लिया गया।

परिजनों ने की मांग- लापरवाही की जांच हो 
इस घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए। परिजनों ने वार्ड के बाहर नारेबाजी कर दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की। विरोध प्रदर्शन बढ़ता देख अस्पताल प्रबंधन ने मामले की आंतरिक जांच कराने की बात कही। लेकिन परिवार स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा हुआ है। उनका कहना है कि वे यह लड़ाई केवल अपने बच्चों के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इस लिए लड़ रहे हैं।