भोपाल। प्रदेश की राजधानी में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। एसआईआर के बाद शहर की वोटर लिस्ट से 3.80 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। पहले सर्वेक्षण कराया गया, फिर दावे और आपत्तियों की सुनवाई हुई, उसके बाद अंतिम रूप से सूची को संशोधित किया गया।
अब शनिवार को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि शहर में कुल कितने मतदाता शेष बचे हैं। एसआईआर से पहले 27 अक्टूबर 2025 की स्थिति में भोपाल में कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाता दर्ज थे। संशोधित सूची में यह संख्या घटकर 17 लाख 45 हजार 453 रह गई है।
गोविंदपुरा से 81 हजार से अधिक नाम हटाए
इसका मतलब है कि यानी लगभग 3 लाख 80 हजार 455 नाम सूची से कम हो गए हैं। यह कमी अलग-अलग कारणों से हुई है, जैसे एक ही व्यक्ति का नाम दो जगह दर्ज होना, पते में बदलाव, मृत्यु या अन्य तकनीकी त्रुटियां। प्रशासन का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए की गई।
सबसे अधिक नाम गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र से हटाए गए हैं। यहां से मंत्री कृष्णा गौर लगातार विधायक चुनी जाती रही हैं। यहां 81 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से कम हुए हैं। इसके बाद नरेला विधानसभा का नंबर आता है, जो मंत्री विश्वास सारंग का क्षेत्र है।
नरेला से हटे 70 हजार से ज्यादा नाम
नरेला से लगभग 70 हजार से ज्यादा नाम हटे हैं। इसी तरह भोपाल मध्य, दक्षिण-पश्चिम और हुजूर विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में मतदाता कम हुए हैं। बैरसिया विधानसभा में सबसे कम लगभग 8 हजार 889 नाम घटे हैं। प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ ने 22 जनवरी तक अपने-अपने बूथों पर बैठकर नए आवेदन फॉर्म 6, 7 और 8 प्राप्त किए।
जिन मतदाताओं का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं था या जिनका नाम नो मैपिंग श्रेणी में रखा गया, उन्हें नोटिस जारी किए गए और 50 दिनों के भीतर उनके दस्तावेजों की जांच की गई। 14 फरवरी तक यह पूरा काम समाप्त कर लिया गया।
100 साल सेअधिक आयु के 125 मतदाता
इस बार अंतिम सूची में उम्र के आधार पर भी आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे। जानकारी के मुताबिक 100 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले मतदाताओं की संख्या करीब 125 है। यह आंकड़ा इसलिए भी खास है क्योंकि इससे यह पता चलता है कि शहर में शतायु मतदाता भी सक्रिय रूप से पंजीकृत हैं और निर्वाचन प्रक्रिया में योगदान दे रहे हैं।
एसआईआर का असर थर्ड जेंडर मतदाताओं पर भी पड़ा है। पहले कुल 166 थर्ड जेंडर वोटर दर्ज थे, जो अब घटकर 72 रह गए हैं। विशेष रूप से मध्य विधानसभा में पहले 104 थर्ड जेंडर मतदाता थे, जो अब 35 रह गए हैं। यह बदलाव पुनरीक्षण और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया के बाद हुआ है।










