भोपाल की स्थानीय अदालत ने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में डीआईएल कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक रमाकांत विजयवर्गीय को 7 वर्ष के सश्रम कारावास और 2.25 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। IPC की धारा 409 और 420 के तहत दोषी ठहराया गया।

भोपाल। स्थानीय अदालत ने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी से जुड़े मामले में भू-माफिया और डीआईएल कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक रमाकांत विजयवर्गीय को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह निर्णय अपर सत्र न्यायाधीश जस्टिस स्वयं प्रकाश दुबे ने सुनाया। जस्टिस दुबे ने आरोपी रमाकांत विजयवर्गीय को भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और 420 के तहत दोषी माना। अदालत ने कारावास के साथ 2 लाख 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 

कोर्ट ने पाया आरोपी ने धन का किया दुरुपयोग
धारा 409 उस स्थिति से संबंधित है जब कोई व्यक्ति अपने पद, जिम्मेदारी या भरोसे का दुरुपयोग कर किसी की संपत्ति या धन का गबन करता है। वहीं धारा 420 धोखाधड़ी और छलपूर्वक धन हड़पने से जुड़ी है। अदालत ने पाया कि आरोपी ने अपने पद का इस्तेमाल विश्वास हासिल करने के लिए किया और उसी भरोसे का दुरुपयोग करते हुए लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया। इस प्रकार यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि विश्वासघात का भी है। 

पहले भी कई मामलों में दोषी पाया गया है रमाकांत
आर्थिक अपराध अक्सर प्रत्यक्ष हिंसा से जुड़े नहीं होते, लेकिन इनका प्रभाव व्यापक होता है। ऐसे मामलों में कई निवेशक या आम नागरिक अपनी जीवन भर की कमाई गंवा देते हैं, जिससे सामाजिक और आर्थिक असंतुलन पैदा होता है। रमाकांत विजयवर्गीय पहले भी अन्य मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं।

वर्ष 2022 में उन्हें एक अलग प्रकरण में आजीवन कारावास की सजा मिली थी, जबकि 2024 में भी एक अन्य मामले में दस वर्ष के सश्रम कारावास का आदेश दिया गया था। इसका अर्थ है कि उनके खिलाफ कई गंभीर मामले न्यायालय में सिद्ध हो चुके हैं।