Bhopal: प्रदेश के उद्योगों पर बिजली का नया बोझ? पॉवर क्वालिटी मीटर अनिवार्य होने पर भड़के 10 हजार उद्यमी

MP PQ meter dispute
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पॉवर क्वालिटी मीटर अनिवार्य होने पर भड़के 10 हजार उद्यमी।

मध्यप्रदेश में PQ मीटर अनिवार्य करने के फैसले ने औद्योगिक क्षेत्रों में विरोध खड़ा कर दिया है। 7–8 लाख रुपये प्रति मीटर की लागत से 10 हजार से ज्यादा उद्यमियों पर असर पड़ सकता है। जानिए पूरा मामला, उद्योगों की आपत्ति और बिजली कंपनी का पक्ष।

भोपाल। मध्यप्रदेश में छोटे और मध्यम उद्योगों के सामने एक नई चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के नए नियमों के तहत एमएसएमई और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में हाई टेंशन उपभोक्ताओं के लिए पॉवर क्वालिटी यानी PQ मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश के उद्योग जगत में नाराजगी बढ़ गई है और इसे उद्योगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बताया जा रहा है। उद्योग संगठनों का कहना है कि आयोग द्वारा 9 जनवरी 2025 को जारी सर्कुलर के आधार पर बिजली वितरण कंपनियों ने अब एचटी उपभोक्ताओं को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है।

अकेले गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में ही 150 से अधिक उद्योगों को PQ मीटर लगाने के नोटिस मिल चुके हैं। फेडरेशन ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, मप्र के पदाधिकारियों के मुताबिक इस फैसले से प्रदेशभर में करीब 10 हजार उद्यमी प्रभावित होंगे। उद्यमियों की सबसे बड़ी चिंता इसकी लागत को लेकर है। उनका कहना है कि एक PQ मीटर लगाने में करीब 7 से 8 लाख रुपए तक का खर्च आएगा, जिसे एक साथ वहन करना एमएसएमई इकाइयों के लिए बेहद कठिन है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं है कि मीटर की खरीद, इंस्टॉलेशन और रखरखाव की जिम्मेदारी पूरी तरह किसकी होगी।

नियमों में ‘नामित उपभोक्ता’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर स्थिति अब भी अस्पष्ट बनी हुई है। उद्योग संगठनों का आरोप है कि बिना किसी तकनीकी सर्वे के सभी एचटी उपभोक्ताओं को एक जैसे नोटिस जारी कर दिए गए हैं। उनका सवाल है कि जिन उद्योगों में न तो हार्मोनिक्स की समस्या है और न ही वोल्टेज अस्थिरता, उन्हें भी PQ मीटर लगाने के लिए क्यों बाध्य किया जा रहा है। साथ ही, सीमित वेंडरों के चयन को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, बिजली वितरण कंपनी का पक्ष है कि ग्रिड में हार्मोनिक्स और वोल्टेज अस्थिरता की समस्या बढ़ रही है, जिससे बिजली की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

PQ मीटर के जरिए रीयल-टाइम डेटा मिलने से ग्रिड की निगरानी बेहतर होगी और आसपास के उपभोक्ताओं को भी स्थिर व गुणवत्तापूर्ण बिजली मिल सकेगी। कंपनी का कहना है कि जिन उपभोक्ताओं के यहां तकनीकी समस्या पाई जाती है, उनके लिए यह मीटर जरूरी है। कुल मिलाकर, पॉवर क्वालिटी या PQ मीटर को लेकर उद्योग और बिजली विभाग के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। उद्यमियों की मांग है कि जब तक नियमों, लागत और लाभ को लेकर पूरी स्पष्टता नहीं दी जाती, तब तक इन आदेशों को स्थगित किया जाए। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

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