मोहन सरकार का बड़ा फैसला: सरदार सरोवर विस्थापितों को प्लॉट की रजिस्ट्री फ्री, 600 करोड़ खर्च करेगी सरकार

MP Cabinet Meeting: सरदार सरोवर विस्थापितों को फ्री रजिस्ट्री, 600 करोड़ का फैसला
गुरजीत कौर की रिपोर्ट
भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया। सरदार सरोवर परियोजना से विस्थापित 25,602 आदिवासी परिवारों को दिए गए आवासीय भूखंडों की रजिस्ट्री अब राज्य सरकार स्वयं कराएगी। इसके लिए लाभार्थियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार इस पर करीब 600 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
सरदार सरोवर परियोजना के चलते विस्थापित हुए हजारों आदिवासी परिवार बीते 25 वर्षों से अपने आवासीय भूखंडों की रजिस्ट्री नहीं करवा पाए थे। आर्थिक कमजोरी के कारण रजिस्ट्री शुल्क वहन करना उनके लिए संभव नहीं था। सरकार के इस फैसले से इन परिवारों को न केवल कानूनी स्वामित्व मिलेगा, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
कैबिनेट का स्पष्ट निर्णय
कैबिनेट बैठक में यह साफ किया गया कि-
- विस्थापित आदिवासी परिवारों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा
- रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया का खर्च राज्य सरकार उठाएगी
- इस फैसले से 25,602 परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा
सरकार ने इसे आदिवासी कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम बताया।
महाकाल लोक की तर्ज पर बनेगा पशुपतिनाथ लोक
कैबिनेट बैठक में उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर पशुपतिनाथ लोक के निर्माण को भी मंजूरी दी गई। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
राज्य कल्याण बोर्ड का विलय
बैठक में राज्य कल्याण बोर्ड को भंग करने और इसके कर्मचारियों का महिला एवं बाल विकास विभाग में विलय करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। सरकार का कहना है कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित होगी।
भवांतर योजना पर सरकार का दावा
कैबिनेट को जानकारी दी गई कि भवांतर योजना के तहत किसानों को भुगतान दो माह के भीतर कर दिया गया है। सरकार ने दावा किया कि यह योजना लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है और वर्तमान में यह योजना पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू है।
सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी
बाणसागर बांध परियोजना से जुड़ी दो नई योजनाओं को कैबिनेट की मंजूरी मिली है। इनमें धनवाही लिफ्ट इरीगेशन योजना और बरही सिंचाई परियोजना शामिल हैं। फिलहाल मध्यप्रदेश इस परियोजना के जल का 60 से 65 प्रतिशत उपयोग कर रहा है।
वित्तीय योजनाओं की अवधि बढ़ी
कैबिनेट बैठक में वित्त विभाग की 8 योजनाओं सहित कई अन्य योजनाओं की अवधि को वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक बढ़ाने का फैसला लिया गया। इन विस्तारित योजनाओं से राज्य सरकार पर 15,009 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा।
सरकार का पक्ष
सरकार ने कहा कि कैबिनेट के ये सभी फैसले आदिवासी कल्याण, किसान हित और बुनियादी विकास को ध्यान में रखकर लिए गए हैं। सरकार का दावा है कि इन निर्णयों से प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए गए हैं।
