MP News: 2026 से 31 के बीच प्रदेश में बनेंगे 25,239 नए आंगनबाड़ी भवन, हर साल 3 हजार नए भवन बनाने का लक्ष्य

महिला-बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया (फाइल फोटो)
भोपाल। मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी व्यवस्था की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है, जहां प्रदेश की 25 प्रतिशत से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र आज भी किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। यह स्थिति बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं पर सीधा असर डालती है। इसी चुनौती को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक अहम प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत 25,239 नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण किया जाएगा। यह निर्माण कार्य वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और हर साल करीब तीन हजार नए भवन तैयार किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
महिला-बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विभागीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया प्रदेश में कुल आंगनवाड़ी केंद्र 97,791 हैं, इसमें से 26,583 किराए के भवनों में चल रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''प्रदेश सरकार आंगनबाड़ियों की स्थिति सुधारने की पहल की है। सरकार लंबे समय से चली आ रही उस समस्या को स्थायी समाधान देना चाहती है, जिसमें आंगनबाड़ी केंद्र अस्थायी, जर्जर या असुविधाजनक भवनों में चल रहे हैं। फिलहाल प्रदेश में कुल 97,791 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें से लगभग 26,583 किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के 14,649 और शहरी क्षेत्रों के 11,934 केंद्र शामिल हैं। यह आंकड़ा बताता है कि समस्या केवल गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े शहरों जैसे भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में भी बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवनों में चल रहे हैं, जहां सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।''
किराये के भवनों में चल रहे अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के बैठने, खेलने और पढ़ने के लिए पर्याप्त जगह तक नहीं होती। कई जगहों पर साफ पानी, शौचालय और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी कमी रहती है। इसका सीधा असर बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा पर पड़ता है। इसी वजह से विभाग ने यह तय किया है कि एक साथ सभी केंद्रों का निर्माण संभव न होने के कारण चरणबद्ध योजना के तहत काम किया जाएगा। प्रत्येक नए आंगनबाड़ी भवन पर करीब 10 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार ने केवल नए भवनों के निर्माण तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि मौजूदा व्यवस्था की निगरानी के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए एक ट्रैकिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे यह पता चल सकेगा कि केंद्र कितने दिन खुले रहे और कितने दिन बंद। इससे जवाबदेही बढ़ेगी और व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। साथ ही, सरकार ने यह भी बताया है कि अब तक 11,786 आंगनबाड़ी केंद्रों को सरकारी भवनों में स्थानांतरित किया जा चुका है और हजारों एक कमरे वाले केंद्रों को बेहतर सुविधायुक्त भवनों में शिफ्ट करने की प्रक्रिया जारी है। आने वाले वर्षों में हजारों केंद्रों को बिजली कनेक्शन देने का भी लक्ष्य रखा गया है। कुल मिलाकर, यह फैसला प्रदेश की आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो बच्चों के भविष्य और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
