Indore Water Contamination: दूषित पानी से मौतों पर उमा भारती भड़कीं, कहा- माफी मांगनी होगी

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मोहन यादव सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
Indore contaminated water case: देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे से पहचाने जाने वाले इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अब गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का रूप ले चुका है। आधिकारिक तौर पर जहां अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, वहीं स्थानीय बीजेपी पार्षद ने इस आंकड़े को बढ़ाकर 15 बताया है। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उमा भारती का मोहन सरकार पर हमला
इंदौर में गंदे पानी से हुई मौतों को लेकर उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे प्रदेश की व्यवस्था पर कलंक करार दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के अंत में इस तरह की घटनाएं न सिर्फ शर्मनाक हैं, बल्कि यह दर्शाती हैं कि व्यवस्था किस हद तक विफल रही है।

उमा भारती ने सवाल उठाया कि जिस शहर को देश में सबसे स्वच्छ माना जाता है, वहां जहरीला पानी लोगों की जान कैसे ले सकता है।
इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में मुआवजे की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दो लाख रुपये का मुआवजा किसी की जिंदगी की कीमत नहीं हो सकता। पीड़ित परिवार जीवन भर इस दर्द के साथ जीते हैं।

उमा भारती ने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि दोषियों को सख्त सजा और पीड़ितों से सार्वजनिक माफी जरूरी है। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व की परीक्षा बताया।
पार्षद का आरोप: शिकायतों को किया गया नजरअंदाज
बीजेपी पार्षद कमल वाघेला का कहना है कि पिछले कई दिनों से पानी की पाइपलाइन में लीकेज की शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन समस्या की जड़ अब तक नहीं खोजी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन को कई बार लिखित शिकायत दी गई, यहां तक कि मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा गया, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
टेंडर और पाइपलाइन पर उठे सवाल
पार्षद के अनुसार, नर्मदा जल परियोजना से जुड़ी नई पाइपलाइन की फाइल महीनों तक लंबित रही। टेंडर जारी होने के बाद भी समय पर काम पूरा नहीं किया गया। इस देरी और लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।
स्थानीय निवासियों द्वारा विधायक, पार्षद और महापौर से कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद समस्या बनी रही।
सीएम हेल्पलाइन तक पहुंची शिकायतें
कमल वाघेला का दावा है कि 311 और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी लंबे समय से शिकायतें दर्ज थीं। महापौर द्वारा त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। 29 दिसंबर 2025 के बाद क्षेत्र में अचानक बीमारी फैलने लगी, जिसके बाद मामला सामने आया।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल के भीतर से भी अब कार्रवाई की मांग तेज हो रही है। फिलहाल प्रशासन की ओर से मौतों के आंकड़े और पानी की गुणवत्ता को लेकर जांच जारी है।
