इंदौर दूषित पानी मामला: हाईकोर्ट की सख्ती, कहा- स्वच्छ पेयजल मौलिक अधिकार; अफसरों पर तय होगी क्रिमिनल जिम्मेदारी

भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17 मौतों पर हाईकोर्ट सख्त। स्वच्छ पेयजल को मौलिक अधिकार बताते हुए सरकार और निगम से जवाब तलब।
इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों ने न सिर्फ शहर बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इसी गंभीर मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने मंगलवार को कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और नगर निगम को साफ संदेश दिया कि स्वच्छ पेयजल हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हाईकोर्ट ने दूषित पानी से जुड़ी पांच जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर की छवि को इस घटना से गहरा आघात पहुंचा है। अब यह मामला केवल स्थानीय समस्या नहीं रह गया, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है।
स्वच्छ पेयजल मौलिक अधिकार
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पेयजल जीवन के अधिकार का हिस्सा है। यदि इस अधिकार के उल्लंघन में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों पर सिविल के साथ-साथ क्रिमिनल जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़ितों को दिया जाने वाला मुआवजा यदि अपर्याप्त पाया गया, तो उसमें बढ़ोतरी के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
कांग्रेस नेताओं का दौरा और सियासी घमासान
इस बीच, दोपहर करीब एक बजे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रभावित भागीरथपुरा क्षेत्र पहुंचे। हालात को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल और वज्र वाहन तैनात किए गए थे। बैरिकेडिंग के चलते पहले पुलिस और नेताओं के बीच तीखी बहस हुई, लेकिन बाद में वे वैकल्पिक मार्ग से भीतर पहुंचे।
कांग्रेस नेताओं ने मृतकों अशोक लाल पवार, जीवन लाल और गीता बाई के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। लौटते समय जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से इस्तीफे की मांग की।
अब तक 17 मौतें, 110 मरीज भर्ती
भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए, जिनमें से कुछ को गंभीर हालत में अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया। कुल 110 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि 421 मरीजों में से 311 को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। फिलहाल 15 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं।
शिकायतों की अनदेखी से बढ़ा संकट
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद प्रभावित इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई जारी रही। यदि पहले की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो इस बड़े हादसे को टाला जा सकता था।
सुनवाई में यह भी सामने आया कि 2022 में नई पाइपलाइन का प्रस्ताव पास होने के बावजूद फंड की कमी के चलते काम अधूरा रह गया। वहीं, 2017-18 में लिए गए 60 में से 59 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे, लेकिन तब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए।
कोर्ट के अहम निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले को सात श्रेणियों में विभाजित करते हुए राज्य सरकार और नगर निगम से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी, जिसमें मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।
