इंदौर में दूषित पानी से 18वीं मौत: 80 वर्षीय बुजुर्ग ने तोड़ा दम, 16 अब भी ICU में भर्ती

80 वर्षीय बुजुर्ग ने तोड़ा दम, 16 अब भी ICU में भर्ती
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इंदौर में दूषित पानी से हो रही लोगों की मौत।

इंदौर शहर में दूषित पानी से फैल रही बीमारी थमने का नाम नहीं ले रही है। भागीरथपुरा इलाके में गंदे पानी के कारण एक और बुजुर्ग की मौत हो गई है।

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी से फैल रही बीमारी थमने का नाम नहीं ले रही है। भागीरथपुरा इलाके में गंदे पानी के कारण एक और बुजुर्ग की मौत हो गई है। 80 वर्षीय हरकुवर बाई ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिसके बाद इस मामले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि अभी भी 16 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं, जिनमें से तीन की हालत नाजुक बनी हुई है और वे वेंटिलेटर पर हैं।

लगातार हो रही मौतों के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। स्थिति यह है कि लोग अब नल के पानी पर पूरी तरह भरोसा खो चुके हैं। भागीरथपुरा में चाय की दुकानों से लेकर होटल और ठेलों तक, हर जगह बोतलबंद और सील पैक पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। दुकानदार साफ तौर पर कह रहे हैं कि नल का पानी इस्तेमाल करने का जोखिम अब कोई नहीं लेना चाहता।

ग्राहकों का भी यही कहना है कि नल के पानी से बनी चाय या खाना अब कोई नहीं खरीदेगा। यह डर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि घरों के भीतर भी हालात बेहद चिंताजनक हैं। पीने के पानी के साथ-साथ खाना बनाने, बच्चों के दूध और बुजुर्गों की जरूरतों के लिए लोग मजबूरी में आरओ और बोतलबंद पानी खरीद रहे हैं। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर रोजाना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है, लेकिन जान की सुरक्षा के आगे कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की गतिविधियां तेज कर दी गई हैं। इलाके में एंटीबैक्टीरियल टीमों को तैनात किया गया है, जो घर-घर जाकर लोगों से जानकारी जुटा रही हैं। यह सर्वे ICMR की विशेष KABO टूल किट के माध्यम से किया जा रहा है, जिसमें हर परिवार से बीमारी के लक्षण, पानी के उपयोग और स्वास्थ्य स्थिति से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस सर्वे का उद्देश्य यह जानना है कि दूषित पानी से किस स्तर तक लोग प्रभावित हुए हैं और किन घरों में संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इसी डेटा के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस बीच एम्स के डॉक्टरों की टीम भी मामले में सक्रिय हो गई है। एम्स के विशेषज्ञ यह जांच कर रहे हैं कि भागीरथपुरा के पानी में आखिर कौन सा बैक्टीरिया मौजूद है, जो इतनी तेजी से लोगों को बीमार कर रहा है और जानलेवा साबित हो रहा है।

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