सत्ता के गलियारों से वैचारिक शिखर तक: भाजपा के 'साइलेंट रणनीतिकार' हितानंद शर्मा को संघ ने सौंपी मध्य क्षेत्र की बड़ी जिम्मेदारी!

हितानंद शर्मा अब जबलपुर केंद्र से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में संघ की बौद्धिक और वैचारिक गतिविधियों का नेतृत्व करेंगे।
भोपाल: मध्य प्रदेश भाजपा के सांगठनिक ढांचे में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा को अब भाजपा से वापस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मुख्य धारा में बुला लिया गया है।
उन्हें 'मध्य क्षेत्र का सह बौद्धिक प्रमुख' नियुक्त किया गया है। यह निर्णय इंदौर में आयोजित संघ की एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया, जिसके बाद अब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति व सांगठनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
1. इंदौर में हुआ फैसला: पार्टी से वापसी और संघ में नई तैनाती
हितानंद शर्मा की जिम्मेदारी बदलने का निर्णय इंदौर स्थित संघ कार्यालय 'सुदर्शन' में लिया गया। यहां 30 और 31 जनवरी को मध्य क्षेत्र की दो दिवसीय 'टोली बैठक' आयोजित की गई थी।
इस बैठक में तय किया गया कि हितानंद शर्मा को भाजपा के सांगठनिक कार्यों से मुक्त कर वापस संघ की मुख्य धारा में लाया जाए।
उन्हें अब मध्य क्षेत्र के बौद्धिक प्रमुख नागेंद्र सिंह के साथ 'डिप्टी' (सह बौद्धिक प्रमुख) के रूप में जबलपुर केंद्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
2. जबलपुर केंद्र: महाकौशल से संचालित होगा मध्य क्षेत्र का विमर्श
हितानंद शर्मा का नया केंद्र जबलपुर निर्धारित किया गया है। सांगठनिक दृष्टिकोण से जबलपुर का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों के बीच वैचारिक समन्वय स्थापित करना सुगम होगा।
सह बौद्धिक प्रमुख के रूप में उनका प्राथमिक दायित्व दोनों राज्यों के कार्यकर्ताओं का बौद्धिक शिक्षण करना, संघ की कार्यपद्धति को और अधिक पैना करना और प्रबुद्ध समाज के बीच वैचारिक विमर्श को नई ऊंचाइयों पर ले जाना होगा।
3. सांगठनिक आरोहण: विद्या भारती की सादगी से सत्ता के शिखर तक
हितानंद शर्मा का सफर अनुशासन और सादगी का एक जीवंत उदाहरण रहा है। मूलतः अशोकनगर के निवासी शर्मा ने अपने सार्वजनिक जीवन की नींव विद्या भारती के माध्यम से रखी।
2020 में जब मध्य प्रदेश की राजनीति संक्रमण काल से गुजर रही थी, तब उन्हें उपचुनावों के प्रबंधन के लिए प्रदेश सह-संगठन मंत्री के रूप में भाजपा में भेजा गया।
2022 में सुहास भगत के उत्तराधिकारी के रूप में उन्होंने संगठन महामंत्री का पद संभाला और बहुत ही कम समय में अपनी कार्यशैली से शीर्ष नेतृत्व का भरोसा जीत लिया।
4. चुनावी महासमर के अजेय सेनापति: जीत के पीछे का मौन श्रम
हितानंद शर्मा की सबसे बड़ी उपलब्धि 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत रही। उन्होंने 'पर्दे के पीछे' रहकर माइक्रो मैनेजमेंट के साथ बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय किया, वह राजनीतिक विशेषज्ञों के लिए शोध का विषय है।
मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर उन्होंने सत्ता और संगठन के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य किया, जिससे विपरीत परिस्थितियों में भी पार्टी ने अकल्पनीय सफलता हासिल की।
5. वैचारिक प्रखरता: संघ और भाजपा के मध्य 'कोऑर्डिनेटर' की भूमिका
एक निष्ठावान संघ प्रचारक के रूप में हितानंद शर्मा की नई नियुक्ति को 'वैचारिक सेतु' के रूप में देखा जा रहा है।
बौद्धिक परिषद का नेतृत्व करते हुए वे यह सुनिश्चित करेंगे कि सत्ता के गलियारों में रहते हुए भी संगठन की मूल विचारधारा और संस्कार धूमिल न हों। उनका कार्य बुद्धिजीवियों, लेखकों और समाज के नीति-निर्माताओं के साथ संवाद स्थापित करना है, ताकि संघ के राष्ट्र निर्माण के संकल्प को हर वर्ग तक पहुंचाया जा सके।
6. मध्य क्षेत्र का सांगठनिक दर्शन और भविष्य की रणनीति
RSS की संरचना में 'मध्य क्षेत्र' मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ एक सशक्त इकाई है, जिसमें मालवा, मध्य भारत और महाकौशल जैसे तीन महत्वपूर्ण प्रांत समाहित हैं।
हितानंद शर्मा की तैनाती इस क्षेत्र में संघ के बौद्धिक ढांचे को और अधिक पेशेवर और प्रभावशाली बनाने के लिए की गई है। उनकी नियुक्ति इस बात का भी संकेत है कि आने वाले समय में संघ अपने कार्यकर्ताओं की वैचारिक गुणवत्ता और सामाजिक प्रभावशीलता पर अधिक ध्यान केंद्रित करने वाला है।
