यमुनानगर: डिलीवरी के दौरान गर्भ में छोड़ी पट्टी, काटनी पड़ी आंत, अब 5 डॉक्टरों पर FIR

यमुनानगर में आरोपियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर डीसी से मिलने पहुंचे परिजन और महिला के गर्भ से निकाली गई पट्टी।
हरियाणा के यमुनानगर जिले में एक निजी अस्पताल की महिला डॉक्टर और उनके सहयोगियों की घोर लापरवाही से 21 वर्षीय प्रसूता की जान दांव पर लग गई। सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में सर्जिकल स्पंज (पट्टी) छोड़ दी गई, जिसे छिपाने के लिए कई नामी डॉक्टरों ने मिलकर फर्जी रिपोर्ट तैयार की।
करीब आठ महीने के लंबे संघर्ष और कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी के कड़े रुख के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी महिला डॉक्टर, उनके पति (डिप्टी CMO) समेत पांच डॉक्टरों के खिलाफ धोखाधड़ी और लापरवाही का मामला दर्ज किया है।
ऑपरेशन के दौरान हुई बड़ी चूक
घटना की शुरुआत 12 मार्च 2025 को हुई, जब जगाधरी के बीबीपुर गांव निवासी ओसामा अपनी गर्भवती पत्नी मेहर खातून को प्रसव के लिए जगाधरी स्थित एसपी अस्पताल ले गए। 13 मार्च की सुबह डॉ. सोना गोयल ने मेहर का सिजेरियन ऑपरेशन किया। आरोप है कि इस दौरान डॉ. सोना के पति डॉ. अनूप गोयल (जो वर्तमान में डिप्टी सिविल सर्जन हैं) भी वहां मौजूद थे।
ऑपरेशन के बाद मेहर ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया और परिवार खुशी-खुशी 70 हजार रुपये खर्च कर घर लौट आया। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि डॉक्टरों ने मेहर के शरीर के भीतर मौत का सामान (सर्जिकल पट्टी) छोड़ दिया है।
सच्चाई छिपाने में जुटे डॉक्टर
डिस्चार्ज के कुछ ही दिनों बाद मेहर की हालत बिगड़ने लगी। उसे टांकों में असहनीय दर्द और सूजन होने लगी। जब परिवार उसे जांच के लिए अन्य डायग्नोस्टिक सेंटर्स पर ले गया, तो वहां के डॉक्टरों ने कथित तौर पर मुख्य आरोपी डॉक्टर को बचाने के लिए साजिश रची।
• इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक सेंटर: आरोप है कि डॉ. प्रदीप तेहलान ने पट्टी की बात छिपाई और रिपोर्ट में इसे महज 'पस' (मवाद) बताया।
• मेहता अल्ट्रासाउंड सेंटर: यहां भी डॉ. निखिल मेहता ने सीटी स्कैन रिपोर्ट में पट्टी को 'रसौली' बताकर परिवार को गुमराह किया।
• चड्ढा अस्पताल: डॉ. कुलदीप चड्ढा पर आरोप है कि उन्होंने परिवार को डराया कि पेट में 'गैस का गोला' है जो कभी भी फट सकता है और तुरंत ऑपरेशन का दबाव बनाया।
पंचकूला के अस्पताल में खुली पोल
जब मेहर की जान पर बन आई, तो परिजन उसे पंचकूला के ओजस अस्पताल ले गए। वहां के डॉक्टरों ने जब जांच की, तो वे दंग रह गए। मेहर के गर्भ में महीनों से एक सर्जिकल स्पंज फंसा हुआ था, जिसकी वजह से पूरे पेट में भयंकर संक्रमण (Infection) फैल चुका था।
24 मई 2025 को हुए आपातकालीन ऑपरेशन में डॉक्टरों को मेहर की संक्रमित हो चुकी आंतों का एक हिस्सा काटना पड़ा ताकि उसकी जान बचाई जा सके। संक्रमण इतना गहरा था कि तीन महीने बाद एक और बड़ा ऑपरेशन कर आंतों को दोबारा जोड़ना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया में पीड़ित परिवार के करीब 10 लाख रुपये खर्च हो गए और महिला को अपूरणीय शारीरिक क्षति हुई।
मंत्री के हस्तक्षेप के बाद टूटी प्रशासन की नींद
पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाईं। डीसी द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट में देरी होने पर मामला जिला कष्ट निवारण समिति (ग्रीवेंस कमेटी) की बैठक में उठा। कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने जब पीड़िता की आपबीती सुनी और जांच में लापरवाही की पुष्टि देखी, तो वे भड़क उठे। उन्होंने पुलिस अधीक्षक (SP) को सीधे निर्देश दिए कि इस संगठित लापरवाही और धोखाधड़ी में शामिल सभी डॉक्टरों पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि डॉक्टरों का काम जान बचाना है, साजिश रचकर मरीज को मौत के मुंह में धकेलना नहीं।
इन 5 डॉक्टरों पर दर्ज हुआ मुकदमा
1. डॉ. सोना गोयल (मुख्य आरोपी, एसपी अस्पताल)
2. डॉ. अनूप गोयल (डिप्टी सीएमओ, सिविल अस्पताल)
3. डॉ. प्रदीप तेहलान (इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक सेंटर)
4. डॉ. निखिल मेहता (मेहता अल्ट्रासाउंड सेंटर)
5. डॉ. कुलदीप चड्ढा (चड्ढा अस्पताल)
पीड़िता बोली- मुझे मौत के दरवाजे पर खड़ा कर दिया था
21 वर्षीय मेहर खातून ने नम आंखों से कहा कि डॉक्टरों की इस मिलीभगत ने उसे मौत के दरवाजे पर खड़ा कर दिया था। वह 8 महीने तक जिस शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजरी है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उसके पति ओसामा ने बताया कि वे आर्थिक रूप से टूट चुके हैं, लेकिन अब दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज होने से उन्हें कानून पर भरोसा जागा है।
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