डेरा प्रमुख राम रहीम को फिर राहत: 40 दिन की पैरोल मंजूर, रोहतक में 15वीं बार सलाखों से बाहर आएगा गुरमीत सिंह

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख।
साध्वियों के यौन शोषण और हत्या जैसे संगीन अपराधों में रोहतक की सुनारिया जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर बड़ी राहत मिली है। प्रशासन ने राम रहीम की 40 दिनों की पैरोल अर्जी को मंजूरी दे दी है। अगस्त 2017 में जेल जाने के बाद से यह 15वां अवसर होगा जब डेरा मुखी जेल की चारदीवारी से बाहर कदम रखेगा।
सिरसा डेरा हेडक्वार्टर में बीतेगा पैरोल का समय
इस बार मिली पैरोल के दौरान राम रहीम का ठिकाना हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा का मुख्य मुख्यालय होगा। इससे पहले कई बार पैरोल मिलने पर उसे उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित बरनावा आश्रम में भेजा जाता था, लेकिन इस बार वह अपने मुख्य डेरे में ही रहेगा। हालांकि, पैरोल के दौरान उन पर कई कड़ी शर्तें भी लागू रहेंगी। वह सीधे तौर पर भीड़ या समर्थकों को संबोधित नहीं कर सकेगा, लेकिन वर्चुअल माध्यम यानी ऑनलाइन वीडियो से अपने अनुयायियों से संवाद करने की छूट उसे दी गई है।
संगीन अपराधों में काट रहा जेल की सजा
गुरमीत राम रहीम का जेल जाने का सिलसिला 25 अगस्त 2017 को शुरू हुआ था, जब पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने उसे दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म का दोषी पाया और 20 साल की कैद सुनाई। इसके बाद जनवरी 2019 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा मिली। वर्तमान में वह इन मामलों में रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। हालांकि, डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह हत्याकांड में हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया है।
2017 से अब तक 15वीं बार बाहर आने का रिकॉर्ड
राम रहीम को पैरोल और फरलो मिलना अब एक नियमित घटनाक्रम जैसा लगने लगा है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उसे अगस्त 2025 में अपने जन्मदिन के अवसर पर जेल से बाहर आने का मौका मिला था। उससे पहले अप्रैल 2025 में भी उसे 21 दिनों की पैरोल दी गई थी। इसी तरह जनवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उसे 30 दिनों की पैरोल मिली थी। अब यह 15वां मौका है जब वह जेल से बाहर आ रहा है। आलोचक अक्सर महत्वपूर्ण चुनाव या आयोजनों के समय उसे मिलने वाली इस राहत पर सवाल उठाते रहे हैं।
सजा सुनाए जाने के बाद 2017 में हिंसा भड़की थीगुरमीत राम रहीम को सजा सुनाए जाने के बाद 2017 में जो हिंसा भड़की थी, उसे देश शायद ही कभी भूल पाएगा। पंचकूला और सिरसा में डेरा समर्थकों की सेना के साथ हुई हिंसक झड़प में 40 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। उस भयावह स्थिति को देखते हुए ही इस बार भी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और पैरोल के दौरान सिरसा हेडक्वार्टर के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
पैरोल और फरलो में ये है अंतर
अक्सर लोग पैरोल और फरलो को एक ही समझते हैं, लेकिन कानून की नजर में ये अलग-अलग हैं। पैरोल सजा काट रहे कैदी को किसी विशेष परिस्थिति में दी जाती है, जैसे परिवार में बीमारी, मृत्यु या किसी करीबी की शादी। यह कैदी का अधिकार नहीं बल्कि प्रशासन की अनुमति पर निर्भर है। वहीं दूसरी ओर फरलो को सजायाफ्ता कैदी का कानूनी अधिकार माना जाता है, ताकि वह समाज और परिवार के साथ अपना संपर्क बनाए रख सके। इसके लिए किसी विशेष कारण या आपात स्थिति की आवश्यकता नहीं होती, बशर्ते कैदी का जेल में आचरण नियमों के अनुसार अच्छा रहा हो।
अगर आपको यह खबर उपयोगी लगी हो, तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूलें और हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए [haribhoomi.com] के साथ।
