प्रदेश के चार बड़े विश्वविद्यालयों MDU रोहतक, GJU हिसार, DCRUST मुरथल और SKAU कुरुक्षेत्र के मौजूदा व पूर्व कुलपति अब सरकार के सख्त निर्देशों पर विजिलेंस के रडार पर हैं।

हरियाणा के उच्च शिक्षा क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। प्रदेश के चार प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में वित्तीय गबन और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोपों ने हड़कंप मचा दिया है। राज्य सरकार के जीरो टॉलरेंस विजन के तहत, स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) ने तीन मौजूदा और एक पूर्व कुलपति (VC) के खिलाफ जांच का चक्रव्यूह तैयार कर लिया है। सरकार के कड़े रुख के बाद अब इन उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की कार्यप्रणाली की गहन पड़ताल की जा रही है। 

इन चार विश्वविद्यालयों पर गिरी गाज 
भ्रष्टाचार की इस जांच की तपिश रोहतक से लेकर कुरुक्षेत्र तक महसूस की जा रही है। विजिलेंस ने जिन संस्थानों को अपने रडार पर लिया है, उनमें शामिल हैं। 
1. महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU), रोहतक
2. गुरु जंभेश्वर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJU), हिसार
3. दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST), मुरथल
4. श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय (SKAU), कुरुक्षेत्र 

50 करोड़ के छात्र कोष का संदिग्ध खेल 
इस पूरे प्रकरण में सबसे सनसनीखेज मामला DCRUST, मुरथल का है। यहां के प्रबंधन पर विद्यार्थियों की फीस और फंड से जुड़े लगभग 50 करोड़ रुपये के हेरफेर का आरोप है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर इस विशाल धनराशि को सरकारी बैंकों के बजाय एक निजी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में जमा कराया। आरोप है कि यह सौदा कम ब्याज दर पर किया गया, जिससे सरकारी खजाने को सीधे तौर पर वित्तीय चोट पहुंचाई गई। विजिलेंस इस बात की तहकीकात कर रही है कि निजी बैंक को फायदा पहुंचाने के पीछे किसका हाथ था। 

MDU और GJU में नियुक्तियों और खरीद में धांधली के आरोप 
भ्रष्टाचार के आरोप केवल फंड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रशासनिक नियुक्तियों में भी भाई-भतीजावाद की बू आ रही है। 
• MDU रोहतक: विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति राजबीर सिंह जांच के घेरे में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान करीब 20,000 पौधों की खरीद में वित्तीय गड़बड़ी की। इसके साथ ही, उन पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों के विरुद्ध नियुक्तियां करने का भी संशय है।
• GJU हिसार: यहां के कुलपति प्रो. नरसी राम पर गैर-शिक्षण पदों (Non-teaching staff) की भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली करने का आरोप है। विजिलेंस उन शिकायतों की जांच कर रही है जिनमें चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का दावा किया गया है। 

SKAU कुरुक्षेत्र में आरक्षण नियमों की अनदेखी
कुरुक्षेत्र स्थित श्री कृष्ण आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. करतार सिंह धीमान पर भी गंभीर तलवार लटक रही है। उन पर आरोप है कि उन्होंने नियुक्तियों के दौरान सरकार द्वारा निर्धारित आरक्षण रोस्टर और भर्ती नियमों का उल्लंघन किया। इस मामले में सामाजिक न्याय और संवैधानिक नियमों की अवहेलना को लेकर सरकार सख्त है। 

समय सीमा में मांगी रिपोर्ट
विजिलेंस ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) अर्शिंदर सिंह चावला ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह मुहिम सरकारी आदेशों के पालन में शुरू की गई है। ब्यूरो ने इस जांच को 'प्राथमिकता' (Priority) के आधार पर लिया है। 
SV&ACB के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि जांच की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। संबंधित जांच अधिकारियों को फाइलें सौंप दी गई हैं और उन्हें एक निश्चित समय अवधि के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। 

आरोपी कुलपतियों ने दावों को पूरी तरह खारिज किया  
हालांकि, जिन कुलपतियों पर ये आरोप लगे हैं, उन्होंने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि ये आरोप 'आधारहीन' हैं और उन्हें केवल बदनाम करने की साजिश है। 
लेकिन, जिस तरह से विजिलेंस ने अपनी सक्रियता बढ़ाई है, उससे स्पष्ट है कि आने वाले दिन हरियाणा के इन शिक्षा संस्थानों के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। राज्य सरकार की इस कार्रवाई ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि शिक्षा के मंदिरों में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सभी की निगाहें विजिलेंस की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि इन प्रतिष्ठित संस्थानों की साख पर लगा यह दाग कितना गहरा है। 

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