खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की जांच के बाद एक राइस मिल में 24,318 क्विंटल धान कम पाए जाने पर ₹5.81 करोड़ के गबन का मामला दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई के बाद जिले भर के राइस मिलर्स में हड़कंप मच गया है।
4 महीने में 'गायब' हो गया करोड़ों का स्टॉक
जांच रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 के सीजन में संबंधित मिल को कस्टम मिलिंग के लिए 39,373 क्विंटल धान आवंटित किया गया था।
- 25 नवंबर 2025: चंडीगढ़ की टीम ने जब फिजिकल वेरिफिकेशन किया था, तब स्टॉक पूरा मिला था।
- 17 मार्च 2026: करीब 4 महीने बाद दोबारा हुई जांच में रिकॉर्ड में भारी हेराफेरी मिली। मिल में आवंटित स्टॉक से 24,318 क्विंटल धान कम पाया गया।
अधिकारियों की मिलीभगत
इस घोटाले के तार महकमे के भीतर तक जुड़े होने की आशंका है। किसान नेता प्रिंस वड़ैच ने आरोप लगाया है कि राइस मिलर्स ने अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी गेट पास काटे और करोड़ों के धान को खुर्द-बुर्द कर दिया।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही जिले के 6 मार्केट कमेटी सेक्रेटरी को इसी मामले में चार्जशीट किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने मिलर्स को अपने यूजर आईडी और पासवर्ड दे दिए थे, जिससे फर्जी गेट पास जारी किए गए।
5 हजार करोड़ के घोटाले का दावा
भाकियू (चढूनी) के प्रवक्ता राकेश बैंस ने इस मामले को प्रदेश स्तर का बताते हुए 5 हजार करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है। किसान संगठनों का दावा है कि वे 2500 करोड़ के घोटाले के सबूत सरकार को सौंप चुके हैं और अब इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग की जा रही है।
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