हरियाणा के नूंह से भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां राज्य सतर्कता ब्यूरो (विजिलेंस) की टीम ने जाल बिछाकर दो लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने एक बेसहारा महिला को सरकारी योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता दिलाने के बदले मोटी रकम की मांग की थी। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में से एक भाजपा नेता का पुत्र बताया जा रहा है, जबकि दूसरा दलाल की भूमिका निभा रहा था।
ये है पूरा मामला
यह पूरा प्रकरण 'दीनदयाल परिवार सुरक्षा योजना' से जुड़ा है। नूंह की रहने वाली एक महिला ने अपने पति को खो दिया था, जिसके बाद नियमानुसार वह सरकार की इस कल्याणकारी योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद पाने की हकदार थी। इसी सहायता राशि को स्वीकृत कराने और दिलाने के नाम पर आरोपितों ने महिला को अपने जाल में फंसाया और बदले में 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगी।
खाते में पैसे आते ही बढ़ाया दबाव
जानकारी के अनुसार 12 मार्च को पीड़िता के बैंक खाते में सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की सहायता राशि हस्तांतरित (Transfer) कर दी गई थी। जैसे ही आरोपितों को इसकी भनक लगी, उन्होंने महिला पर वादे के मुताबिक पैसे देने का मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया। लगातार मिल रही धमकियों और मांग से परेशान होकर महिला ने विजिलेंस विभाग का दरवाजा खटखटाया और पूरी घटना की लिखित शिकायत दर्ज कराई।
बड़कली चौक पर विजिलेंस ने बिछाया जाल
शिकायत मिलते ही विजिलेंस की टीम ने कार्रवाई की रणनीति तैयार की। टीम ने बड़कली चौक स्थित 'सलीम होटल' में जाल बिछाया, जहां आरोपितों ने महिला को रिश्वत की पहली किस्त देने के लिए बुलाया था। जैसे ही महिला ने आरोपितों को 50 हजार रुपये थमाए, पहले से घात लगाकर बैठी विजिलेंस टीम ने दबिश दी और दोनों को रंगे हाथों दबोच लिया। मौके पर ही उनके पास से रिश्वत की वह राशि बरामद कर ली गई।
आरोपियों की पहचान
पकड़े गए आरोपितों की पहचान बिसरू गांव निवासी तरुण कुमार और गिर्राज के रूप में हुई है। तरुण सीएससी (Common Service Center) संचालक है और स्थानीय भाजपा नेता का पुत्र बताया जा रहा है। वहीं गिर्राज इसकी पहचान एक बिचौलिए (दलाल) के तौर पर हुई है, जो इस पूरी डील को अंजाम देने में मदद कर रहा था।
कानूनी कार्रवाई जारी
विजिलेंस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन लोगों ने पहले भी किसी अन्य व्यक्ति के साथ इस तरह की धोखाधड़ी की है। विभाग का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी।