Dr. Ramesh Chandra Arya: अब रोहतक के नागिरक अस्पताल में भी कीमो थेरैपी की सुविधा शुरू हो गई है। यह कीमो थेरैपी उन कैंसर के मरीजों की दी जाएगी, जो पीजीआई से एक और दूसरी कीमो के बाद नॉर्मल रहेंगे। आसान शब्दों में समझाएं तो कैंसर के मरीजों पहली और दूसरी कीमो थेरैपी पीजीआई में ही करवानी होगी, इन दोनों कीमो थेरैपी के बाद अगर मरीज को किसी तरह का साइड इफेक्ट नहीं होता है तो वह नागिरक अस्पताल में कीमो थेरैपी करवा सकता है। गौर करने लायक है कि अभी तक कीमो थेरैपी या तो पीजीआईएमएस में होती थी या प्राइवेट अस्पतालों में। नागिरक अस्पतालों में यह सुविधा नहीं थी, अब इसे शुरू कर दिया है। इससे उन मरीजों को राहत मिलेगी जिन्हें कीमो थेरैपी करवाने के लिए पीजीआई में इंतजार करना पड़ता है। 

नागिरक अस्पताल में कीमो थेरैपी शुरू होने से पीजीआई से भी मरीजों का दबाव कम होगा। यह नई जानकारी रोहतक के सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंद्र आर्य ने दी। डॉ. रमेश चंद्र आर्य शुक्रवार को हरिभूमि के ‘सप्ताह के अतिथि’ कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे। डॉ. रमेश चंद्र ने इस दौरान बहुत सी जानकारी सांझा की और लिंगानुपात पर भी वे सख्त नजर आए। उन्होंने कहा कि भ्रूण लिंग जांच जैसे घिनौने अपराध पर अब कोई नरमी नहीं, कोई समझौता नहीं। रोहतक में लिंग जांच कराने वालों और कराने वालों को बचाने वालों दोनों पर हमारी सीधी नजर है। गुप्त सूचनाओं पर तुरंत छापेमारी हो रही है और कई मामलों में आरोपी रंगे हाथों पकड़े जा चुके हैं। सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंद्र आर्य ने कहा कि लिंग जांच पर जीरो टॉलरेंस और इलाज में नो कॉम्प्रोमाइज की पॉलिसी हमारी पहचान है। 

शिकायत पर तुरंत कार्रवाई

सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंद्र आर्य ने बताया कि आयुष्मान कार्ड से प्राइवेट अस्पतालों में इलाज हो रहे हैं। लेकिन अगर कहीं लापरवाही या किसी तरह की कोताही सामने आती है तो हम एक्यान लेंगे। अगर किसी मरीज ने शिकायत की और जांच में प्राइवेट अस्पताल की खामियां नजर आई तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी, इसे लेकर कोई समझौता नहीं होगा। 

लिंगानुपात : 10 अंकों की छलांग, सेक्स रेशो पहुंचा 898

सेक्स रेशो पर बात करते हुए डॉ. आर्य ने बताया कि रोहतक जिले में 10 अंकों की सुधार के साथ आंकड़ा 898 तक पहुंचा है, लेकिन अभी लंबी लड़ाई बाकी है। इसके लिए कानून का सख्त पालन और सामाजिक जागरूकता दोनों जरूरी हैं। प्रदूषण को लेकर चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ता प्रदूषण एलर्जी और फेफड़ों की बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है। साफ वातावरण, मास्क का इस्तेमाल और नियमित हेल्थ चेकअप से खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।

दवाएं : नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की गई

स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर डॉ. रमेश चंद्र आर्य ने कहा कि सिविल अस्पताल में लोगों को बेहतर और सुलभ इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। बहुत से लोग निजी अस्पतालों में इलाज कराना चाहते हैं, लेकिन सिविल अस्पताल की सुविधाएं उनसे कहीं बेहतर हैं। यही कारण है कि लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सिविल सर्जन ने बताया कि बीमारी के प्रकार के अनुसार मरीजों को पीएचसी और सीएचसी सेंटरों से भी सभी आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं। दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को भी राहत मिल रही है।

इलाज : एलोपेथी, होम्योपैथी और आयुर्वेद तीनों का अपना महत्व

डॉ. आर्य ने कहा कि आज के दौर में कोई भी बीमारी लाइलाज नहीं है। हर बीमारी का इलाज संभव है, बस जरूरत है समय पर जांच और सही उपचार की। इलाज की पद्धतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि एलोपेथी, होम्योपैथी और आयुर्वेद तीनों का अपना-अपना महत्व है। एलोपेथी में जहां असर जल्दी दिखाई देता है, वहीं होम्योपैथी और आयुर्वेदिक उपचार भी कई मामलों में बेहतर परिणाम देते हैं। आज लोग इन तीनों पद्धतियों को अपना रहे हैं। 

मिलावट खोर: विभाग की पैनी नजरें

सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंद्र आर्य ने बताया कि मिलावट खोरों पर खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की पैनी नजरें हैं। रोहतक में विभाग की ओर से पूरी तरह मुस्तैदी बरती जा रही है। सैंपलिंग होती है और सैंपल फेल आने पर नियमानुसार कार्यवाही भी अमल में लाई जाती है।