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Murthal Dhabas: मुरथल के ढाबों के पराठे को खाने के लिए लोग हरियाणा और दिल्ली ही नहीं बल्कि कई राज्यों से आते हैं। मुरथल के ढाबों पर सफेद मक्खन के परोसे जाने वाले पराठे का स्वाद और कहीं नहीं मिलता है। कहने को यह केवल ढाबा है, लेकिन आप अगर यहां का एक पराठा भी खा लेंगे तो दिल खुश हो जाएगा।
यही कारण है कि दूर-दूर से लोग यहां पराठों का स्वाद लेने के लिए आते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि यहां के किसी भी ढाबे में मांसाहारी भोजन नहीं मिलता है। यहां पर केवल शाकाहारी भोजन ही पड़ोसी जाते हैं। कहा जाता है कि इसके पीछे एक कहानी है और आज हम इस आर्टिकल में उसी के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। लोग कहते हैं कि इसके पीछे की कहानी आस्था और धार्मिक भावना से जुड़ी हुई है।
जानें क्या है इसके पीछे की कहानी
मुरथल गांव में सबसे पहला ढाबा सीताराम ने करीब 1950 में शुरू किया था। इसके बाद 1956 में अमरीक-सुखदेव के पिता प्रकाश सिंह ने अपना ढाबा शुरू किया था और जिन्होंने अपने दोनों बेटों के नाम पर इस ढाबे का नाम रखा। उस समय गांव मलिकपुर के संत बाबा कलीनाथ अपने आशीर्वादों, चमत्कारों और जनकल्याण के लिए पूरे क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध थे। जिन्होंने प्रकाश सिंह को बुलाकर अपने ढाबे पर केवल शाकाहारी भोजन बनाने का आदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जो भी मांसाहार यहां के ढाबे में मांसाहारी भोजन बेचेगा वह बर्बाद हो जाएगा।
ये ढाबे हो गए थे बर्बाद
इसके बाद 70 से 80 दशक के बीच बाबा कहीं चले गए। बाद में उनका कोई अता-पता नहीं लगा लेकिन आज भी किसी भी ढाबे पर मांसाहार नहीं बेचा जाता। बताया जाता है कि यहां दो ढाबा संचालकों ने मांसाहार बेचना शुरू किया था। जिसमें से एक तो एक ही महीने के भीतर बंद हो गया और दूसरे को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। इस चलते आज भी यहां के लोग बाबा की कही गई बात को मानते हैं और मांसाहारी भोजन किसी भी ढाबे पर नहीं परोसा जाता है। इसके अलावा मुरथल में बावरिया संप्रदाय और बाबा नागेवाले की बड़ी मान्यता है और दोनों के मंदिर भी यहां पर स्थापित हैं।
यहां की ये डिशेज नॉनवेज से भी ज्यादा स्वादिष्ट
फिर भी अगर आप नॉनवेज खाने के शौकीन हैं तो यहां पर सोया चाप और पनीर की कई डिश परोसी जाती हैं, जो आपको नॉनवेज से भी ज्यादा पसंद आएगा। ढाबों और चाप की दुकानों पर शाम को सोया चाप के कई व्यंजन और पनीर टिक्का समेत अन्य पकवानों की मांग बढ़ जाती है।
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लोग यहां पहुंचकर मांसाहार की बजाय शाकाहारी भोजन खाना पसंद करते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होता है। पहले यहां पर पराठे के साथ-साथ दाल मखनी और मीठे के रूप में खीर ही मिलती थी, लेकिन अब यहां पर सभी प्रकार के शाकाहारी भोजन परोसे जाते हैं।
