संस्थान के फैसले से लगभग 5,300 छात्र प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 2,500 घर लौट चुके हैं। सबसे ज्यादा संकट विदेशी छात्रों पर है, जिन्हें हवाई टिकटों की भारी कीमतों और अंतरराष्ट्रीय तनाव से घर लौटने में दिक्कत हो रही है।

हरियाणा के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) कुरुक्षेत्र में इन दिनों स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। संस्थान के इतिहास में संभवतः यह पहली बार है जब प्रशासन ने अचानक अनिश्चितकालीन छुट्टियों की घोषणा कर विद्यार्थियों को तत्काल हॉस्टल खाली करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद परिसर में अफरा-तफरी का माहौल है और छात्र संस्थान की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। 

जांच समिति के दौरे से पहले 'बहानेबाजी' का आरोप 
संस्थान में पिछले कुछ समय में हुए सुसाइड और सुसाइड अटेम्प्ट के मामलों की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। यह टीम छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और वार्डन से सीधे संवाद कर वस्तुस्थिति का पता लगाने वाली है।

हालांकि, छात्रों का आरोप है कि 23 अप्रैल को आने वाली इस जांच टीम से उन्हें दूर रखने के लिए प्रशासन ने 'हॉस्टल खाली' करने का दांव खेला है। विद्यार्थियों का कहना है कि प्रशासन नहीं चाहता कि छात्र जांच दल के सामने अपनी समस्याएं या संस्थान की खामियां उजागर करें। उनका दावा है कि छुट्टियों का बहाना बनाकर उन्हें परिसर से बाहर किया जा रहा है ताकि जांच की प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके।

वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां वापस लीं  
मामला केवल छात्रों की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है। गौरतलब है कि पिछले महीने 29 मार्च को केंद्रीय मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. बीवी रमना रेड्डी की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां वापस ले ली थीं। इसके ठीक अगले दिन जांच कमेटी बनाई गई, जिसने अप्रैल के प्रथम सप्ताह में प्रारंभिक मुआयना किया था। अब 23-24 अप्रैल को होने वाला आगामी दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

हजारों छात्रों का पलायन, विदेशी छात्र फंसे संकट में 
संस्थान के आदेश के बाद लगभग 5300 छात्रों वाले इस परिसर से अब तक 2500 से अधिक छात्र घर लौट चुके हैं, लेकिन सबसे विकट स्थिति विदेशी छात्रों की है। नेपाल, भूटान, श्रीलंका, दुबई, ओमान, और अफगानिस्तान जैसे देशों से आए छात्रों के लिए अचानक घर जाना मुमकिन नहीं है। 

दुबई और ओमान के छात्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव (ईरान-इजराइल विवाद) के कारण हवाई टिकटों के दाम 70,000 रुपये तक पहुंच गए हैं, जिसे वहन करना उनके बस में नहीं है। छात्रों का तर्क है कि हॉस्टल से बाहर रहना उनके लिए असुरक्षित और खर्चीला है। 

प्रशासन बोला- विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य प्राथमिकता 
इस पूरे विवाद के बीच संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो. ब्रह्मजीत सिंह मीडिया के समक्ष आए। उन्होंने अचानक छुट्टियों के फैसले को छात्रों के हित में बताते हुए कहा कि वर्तमान परिवेश में सोशल मीडिया की अधिकता के कारण छात्र एकाकीपन का शिकार हो रहे हैं। उनका अपने अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद कम हो गया है, जिससे वे मानसिक रूप से कमजोर महसूस कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि छात्रों को वापस उनके परिवारों के बीच भेजने का निर्णय उनके मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया गया है। 

सुधार के लिए 'थ्री-टियर' कमेटी का गठन
संस्थान ने दावा किया है कि वे छात्रों की समस्याओं के प्रति गंभीर हैं और इसके समाधान के लिए तीन स्तरों पर काम किया जा रहा है। वार्डन प्रतिदिन हॉस्टल में जाकर छात्रों से सीधे बात करेंगे। प्रत्येक 20-25 छात्रों पर एक फैकल्टी मेंटर नियुक्त किया गया है, जो फोन और व्यक्तिगत रूप से उनके संपर्क में रहेगा। हर हॉस्टल के लिए दो विशेष प्रोफेसर नियुक्त किए गए हैं जो छात्रों की रोजमर्रा की समस्याओं का निवारण करेंगे।

सीबीआई जांच से इनकार 
भले ही संस्थान ने आंतरिक जांच के लिए प्रो. लीली दीवान की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी (जिसमें प्रो. जेके कपूर, प्रो. प्रवीण अग्रवाल, डॉ. संदीप सिंघल और डॉ. मनोज सिन्हा शामिल हैं) बनाई है, लेकिन प्रशासन ने किसी भी बाहरी एजेंसी या सीबीआई (CBI) से जांच कराने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। 

फिलहाल, छात्र अनिश्चितता के साये में हैं। 17 अप्रैल को जारी पिछले नोटिस में 4 मई तक छुट्टियां थीं, लेकिन अब नए आदेशों ने छात्रों को वेबसाइट पर लगातार नजर रखने को मजबूर कर दिया है, क्योंकि उन्हें डर है कि संस्थान किसी भी समय उन्हें वापस बुला सकता है।

जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार 
NIT कुरुक्षेत्र में उपजा यह विवाद प्रशासन की कार्यप्रणाली और छात्रों के भरोसे के बीच की खाई को दर्शाता है। क्या यह वास्तव में छात्रों की भलाई के लिए उठाया गया कदम है या जांच से बचने की कोई रणनीति, यह तो आने वाले दिनों में जांच कमेटी की रिपोर्ट ही साफ करेगी। 

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