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Jamia Millia Islamia Surgeons: दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया के दंत चिकित्सा संकाय के सर्जनों डॉक्टरों 8 साल के बच्चे की सर्जरी कर नया जीवन दिया। बताया जा रहा है कि बच्चा बाइलेटरल टीएमजे एंकिलोसिस नाम की बीमारी से पीड़ित था। जिसमें निचले जबड़े का जोड़ (टीएमजे) सिर के आधार से जुड़ जाता है, इस बीमारी के चलते पीड़ित व्यक्ति के लिए मुंह खोलना असंभव हो जाता है। प्रो डॉ. इमरान खान के नेतृत्व में कुशल डॉक्टरों की टीम ने इस बच्चे की सर्जरी को सफल बनाया।
पिता ने काटे थे कई अस्पतालों के चक्कर
बच्चे के पिता जितेंद्र ने बताया कि जब उनका बच्चा 5 साल का था, तभी उसकी ठुड्डी में चोट लग गई थी और तब से ही उसका मुंह धीरे-धीरे खुलना बंद हो गया। बच्चे का मुंह खाने तक के लिए एक मिमी भी खुल पाता था। जिसके कारण वह केवल तरल आहार की ले पाता था और वह शारीरिक रूप से बहुत कमजोर और कुपोषित हो गया था। कई निजी अस्पतालों के चक्कर काटे जहां उन्हें बताया गया कि सर्जरी के लिए उन्हें लाखों रुपये देने होंगे।
दिहाड़ी मजदूर है बच्चे का पिता
जितेंद्र पेशे से दिहाड़ी मजदूर है और उनके लिए सर्जरी के लिए पैसे जुटाना मुश्किल हो गया था। उन्होंने प्रमुख सरकारी संस्थानों में भी जाने की कोशिश की, लेकिन वहां प्रतीक्षा की लिस्ट बहुत लंबी थी। बाद में उन्हें एक डॉक्टर द्वारा ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग, दंत चिकित्सा संकाय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में रेफर किया गया, जहां ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के प्रो डॉ इमरान खान ने उस बच्चे की जांच की।
7 घंटे तक चली थी सर्जरी
मुख्य सर्जन प्रो. इमरान खान ने बताया कि एनेस्थेटिक चुनौतियों और इसमें शामिल सर्जिकल जोखिमों के कारण 7 घंटे लंबी यह सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण रही थी। उन्होंने बताया कि एनेस्थीसिया की टीम का नेतृत्व प्रो. खरात एम भट्ट नेटीम के डॉ. प्रतिभा पंजियार के साथ किया। इस सर्जरी में बच्चे के निचले जबड़े के जोड़ (टीएमजे) और खोपड़ी के आधार के बीच जुड़े हुए हड्डी के मास को हटाया गया और एक नया जोड़ बनाया गया
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3 साल बाद बच्चे ने खोला मुंह
इस सर्जरी के बाद बच्चे ने लगभग 3 साल बाद अपना मुंह खोला और खाने-पीने लगा है। प्रो इमरान खान ने बताया कि सूर्या की गहन निगरानी की जाएगी और अगले कुछ महीनों से लेकर सालों तक उसके जबड़े की फिजियोथेरेपी की जाएगी।
