हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थानीय अदालत ने एक महिला की ओर से अपने ही पति की निर्मम हत्या की साजिश रचने के आरोप में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। प्रेम संबंधों में बाधा बन रहे पति को रास्ते से हटाने के लिए रची गई इस खूनी साजिश में शामिल मृतक की पत्नी, उसके प्रेमी और एक सहयोगी को न्यायालय ने उम्रकैद की सजा दी है।
ऐसे बनाई पति को रास्ते से हटाने की योजना
यह घटना कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा क्षेत्र के गांव अधोया की है। पुलिस रिकॉर्ड और अदालत की कार्यवाही के अनुसार मृतक मनजीत सिंह (35) की पत्नी बलजिंद्र कौर के जसविंद्र सिंह के साथ नाजायज संबंध थे। अपने इन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए बलजिंद्र ने अपने पति को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। इस साजिश में उसने अपने प्रेमी जसविंद्र और उसके एक मित्र बलजीत सिंह निवासी पटियाला, पंजाब को भी शामिल किया।
20 जुलाई की रात को तेजधार हथियारों से हमला किया
जुलाई 2020 में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया। साजिश के तहत बलजिंद्र कौर वारदात से पहले ही अपने 8 वर्षीय बेटे को लेकर मायके चली गई थी, ताकि किसी को उस पर शक न हो। 20 जुलाई की रात जब मनजीत सिंह घर में बिल्कुल अकेला था, तब दोषी जसविंद्र और बलजीत दीवार फांदकर घर के अंदर दाखिल हुए। उन्होंने सो रहे मनजीत पर तेजधार हथियारों से हमला कर उसका गला रेत दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
आरोपियों ने रची झूठी कहानी
वारदात को अंजाम देने के बाद अगले दिन सुबह बलजिंद्र कौर ने एक नाटक रचा। उसने मनजीत की मां को फोन करके कहा कि मनजीत का फोन नहीं मिल रहा है और वह परेशान है। जब मनजीत की मां घर पहुंची तो अंदर का दृश्य भयावह था। मनजीत का शव खून से लथपथ हालत में कमरे में पड़ा हुआ था। सदर पिहोवा थाना पुलिस ने मृतक की मां बलदेव कौर की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया और तफ्तीश शुरू की।
न्यायालय का कड़ा रुख
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए और पेश किए गए गवाहों व वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी माना। अदालत ने प्रेमी जसविंद्र और सहयोगी बलजीत को धारा 302 के तहत उम्रकैद और 1-1 लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई। इसके अलावा धारा 460 (घर में घुसकर हमला) के तहत 10-10 साल की कड़ी कैद और 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। दोषी पत्नी बलजिंद्र कौर को हत्या की साजिश रचने (धारा 120-B) के अपराध में उसे आजीवन कठोर कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त समय जेल में बिताना होगा।
6 साल बाद मिला न्याय
यह कानूनी लड़ाई लगभग 6 वर्षों तक चली। पुलिस की ओर से इकट्ठा किए गए साक्ष्यों ने यह साबित कर दिया कि जिस समय मनजीत की हत्या हुई, उसकी पत्नी भले ही मायके में थी, लेकिन वह पल-पल की जानकारी अपने प्रेमी को दे रही थी। अदालत के इस फैसले से समाज में एक कड़ा संदेश गया है कि अपराध की जड़ें कितनी भी गहरी क्यों न हों, कानून के हाथ वहां तक पहुंच ही जाते हैं।