मूल रूप से दार्जिलिंग के युवक ने तावड़ू में किराए के मकान में अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी। पुलिस के अनुसार वह शराब का आदी था और अक्सर घरेलू कलह करता था। उसने पत्नी को पटक-पटक कर मार डाला था।

हरियाणा के नूंह जिले की एक स्थानीय अदालत ने पारिवारिक हिंसा और हत्या के एक जघन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। साल 2019 में अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या करने वाले दोषी पति को कोर्ट ने ताउम्र कैद की सजा सुनाई है। यह मामला न केवल एक महिला के साथ हुई क्रूरता को दर्शाता है, बल्कि समाज में बढ़ती नशे की लत के खतरनाक परिणामों को भी उजागर करता है।

कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रेणु राणा की अदालत ने सोमवार को इस मामले पर अंतिम सुनवाई करते हुए आरोपी लुजरस को दोषी पाया। कोर्ट ने उसे आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सजा के साथ-साथ अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी जुर्माना भरने में विफल रहता है, तो उसे दो महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

शराब की लत बनी कारण
यह दर्दनाक घटना 30 अक्टूबर 2019 की है। दोषी लुजरस, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले का निवासी था, तावड़ू थाना क्षेत्र के अंतर्गत हनुमान नगर (खोरी कलां) में अपनी पत्नी सुशिता के साथ किराए के कमरे में रहता था। 
पुलिस रिकॉर्ड और गवाहों के अनुसार लुजरस अत्यधिक शराब पीने का आदी था। नशे की हालत में वह अक्सर अपनी पत्नी के साथ गाली-गलौज और मारपीट करता था। घटना वाली रात भी वह भारी नशे में घर लौटा और छोटी सी बात पर अपनी पत्नी से झगड़ने लगा।

क्रूरता की हदें पार, मौके पर ही तोड़ा दम
विवाद के दौरान गुस्सा इस कदर बढ़ा कि लुजरस ने सुशिता को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। उसने पत्नी को जमीन पर पटक-पटक कर गंभीर चोटें पहुंचाईं। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि सुशिता ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी वहां से फरार होने की कोशिश में था, लेकिन अगली सुबह अन्य किरायेदारों ने कमरे में खून से लथपथ शव देखकर मकान मालिक और पुलिस को सूचित किया।

6 साल की कानूनी लड़ाई लड़ी 
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और आरोपी के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज किया। करीब 6 साल तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया, गवाहों के बयानों और वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर नूंह की सेशन कोर्ट ने 9 मार्च को लुजरस को दोषी ठहराया था।
16 मार्च को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल और जांच के दौरान लुजरस ने जितना समय जेल में बिताया है, उसे उसकी कुल सजा की अवधि में शामिल किया जाएगा। इस फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने न्याय मिलने पर राहत की सांस ली है।

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