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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि पंजाब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अपनी जिद पर अड़ा हुआ है। जिससे हरियाणा को अपने हक का पानी नहीं मिल रहा है। पानी देना तो दूर, पंजाब की मान सरकार अपने क्षेत्र में एसवाईएल बनाने के लिए भी तैयार नहीं है।

Chandigarh : सतलुज-यमुना लिंक नहर (एसवाईएल) विवाद पर हरियाणा-पंजाब के सीएम और अधिकारियों के बीच तीसरी बैठक भी बेनतीजा रही। चंडीगढ़ में केंद्रीय जलमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में करीब 1.20 घंटे तक चली बैठक में में दोनों राज्य अपने पुराने  स्टैंड पर कायम रहे।

हम अपने स्टैंड पर कामय : मान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मीटिंग खत्म होने  के बाद कहा कि हम अपने पुराने स्टैंड पर कायम हैं। पंजाब का 70 फीसदी हिस्सा डार्क जोन में है। हमारे पास देने के लिए  अतिरिक्त पानी नहीं है। हम हरियाणा को यमुना से पानी देने का एतराज नहीं करते है। दूसरी तरफ, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने कहा कि पंजाब के साथ एसवाईएल पर मीटिंग मनोहर माहौल में बात हुई है, लेकिन एक मान है कि मानता नहीं। मौजूदा  चैनल 66 साल से भी पुराना हो चुका है। पानी के नेचुरल फ्लों के आर्टिफिशियल चैनल का निर्माण जरूरी है। पंजाब सरकार नहर का निर्माण करवाए। एसवाईएल हमारा अधिकार है इसे हम लेकर रहेंगे।

हरियाणा से सीख ले पंजाब : शेखावत
शेखावत ने दोनों राज्यों में घटते भूजल स्तर पर चिंता व्यक्त की और इस दिशा में समर्पित प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के लिए हरियाणा सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हरियाणा ने सूक्ष्म सिंचाई के मामले में 1000 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की है। पंजाब को भी हरियाणा से सीख लेनी चाहिए।

नहर निर्माण अलग विषय
बैठक के दौरान सीएम मनोहर ने कहा कि एसवाईएल का निर्माण और पानी के बंटवारे का विषय अलग-अलग है, लेकिन पंजाब एसवाईएल निर्माण के विषय पर अटका है, जबकि हमें सामूहिक रूप से इस विषय पर आगे बढ़ना चाहिए।

हट नहीं छोड़ रहा पंजाब 

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि एसवाईएल पर हरियाणा का हक है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आ चुका है। जिसमें केंद्र से दोनों प्रदेशों के बीच आम सहमति बनाने को कहा है, परंतु पंजाब की सरकार अपनी हट पर अड़ी हुई है। जिससे हरियाणा के हितों की अनदेखी हो रही है। 
 

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