सिरसा की मंडी में डिजिटल पोर्टल में आ रही तकनीकी खामियों से किसान काफी परेशान है, इसके साथ ही उनको खराब मौसम के कारण गेहूं के खराब होने की चिंता भी सता है। लेकिन फिर भी गोदाम अधिकारी इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

सिरसा मंडी में संकट: सिरसा की अनाज मंडियों में इन दिनों किसान और आढ़ती दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर खराब मौसम की चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर सरकार के डिजिटल पोर्टल और FCI (भारतीय खाद्य निगम) की ई-खरीद प्रणाली में तकनीकी खामियों ने गेहूं के उठान को पूरी तरह ठप कर दिया है। मंडियों में हजारों क्विंटल गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है, जबकि नाथुसरी चौपटा जैसी मंडियों में गेहूं भीगने की खबरें भी सामने आ रही हैं। 

खाली होकर भी 'लॉग-आउट' नहीं हो रही गाड़ियां
आढ़ती एसोसिएशन का आरोप है कि सरकार का डिजिटल सिस्टम सुविधा के बजाय परेशानी का सबब बन गया है। सबसे बड़ी समस्या FCI के ई-खरीद पोर्टल की है, जिसमें कनेक्टिविटी न होने के कारण गाड़ियां 'लॉग-आउट' नहीं हो पा रही हैं। आढ़तियों के अनुसार, गाड़ियां मंडी से गेहूं भरकर गोदाम जाती हैं और वहां खाली भी हो जाती हैं। लेकिन पोर्टल पर कनेक्टिविटी न होने के कारण वे 'लॉग-आउट' नहीं दिखाई देतीं। सिस्टम में गाड़ी 'लॉग-इन' ही रहती है, जिससे उसी गाड़ी का दोबारा इस्तेमाल या रिकॉर्ड अपडेट करना असंभव हो जाता है। गोदाम अधिकारी इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

ऑनलाइन रिकॉर्ड न होने उठान की प्रक्रिया ठप
हरियाणा राज्य आढ़ती एसोसिएशन के उप प्रधान मनोहर मेहता ने कहा कि यह समस्या केवल सिरसा की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की है। साइट न चलने के कारण काम ऑफलाइन करना पड़ रहा है, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड न सुधरने से उठान की प्रक्रिया ठप पड़ी है। वहीं, शहरी प्रधान कीर्ति गर्ग ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पक्ष का कोई भी प्रतिनिधि किसानों का हाल जानने नहीं पहुंचा है, जबकि विपक्ष लगातार मंडियों का दौरा कर रहा है।

प्रशासन का दावा कि मॉनिटरिंग जारी 
मंडियों में गेहूं के अंबार लगे हैं और तिरपाल की कमी के कारण बारिश में फसल खराब होने का डर है। इस पर मार्केट कमेटी के सचिव वीरेंद्र मेहता ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि मंडी में आने के बाद किसान की फसल भीगती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित एजेंसी या आढ़ती जिम्मेदार होंगे। प्रशासन का दावा है कि मॉनिटरिंग जारी है, लेकिन धरातल पर उठान की धीमी गति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

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