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लोकसभा चुनाव में अब केवल कुछ ही समय शेष बचा है। हरियाणा की बात करें तो छठे चरण में 25 मई को मतदान होना है। लेकिन, प्रदेश के कई गांवों में बीजेपी-जेजेपी के नेताओं और प्रत्याशियों का लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पढ़िये इसके पीछे की वजह...

हरियाणा के कई इलाकों में भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी के नेताओं का विरोध हो रहा है। विशेषकर हिसार और सिरसा में दोनों दलों के नेताओं को खासे विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि पूर्व सीएम मनोहर लाल को भी हिसार के बरवाला में विरोध का सामना करना पड़ता, लेकिन पुलिस ने वक्त रहते ही प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था। खास बात है कि लोगों के समक्ष दोनों दलों के नेता अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं, फिर भी बात नहीं बनी है। ऐसे में कांग्रेस से राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने लोगों से बीजेपी-जेजेपी नेताओं से व्यवहार को लेकर बड़ा बयान दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दीपेंद्र हुड्डा ने कहा है कि बीजेपी और जेजेपी नेताओं और उम्मीदवारों को गांवों और शहरों में जाने पर नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी-जेजेपी सरकार ने विकास का कोई भी कार्य नहीं किया, लेकिन प्रदेश को लूटने और हर वर्ग को अपमानित करने का काम किया है। इस कारण उनकी एंट्री रोकी जा रही है।

उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि बीजेपी-जेजेपी नेताओं का गांवों और शहरों में एंट्री का विरोध न करें, लेकिन इस नाराजगी को अपने दिलों में बनाए रखें और मतदान के दिन अपने वोट से उन पर चोट करें। साथ ही, आग्रह किया कि प्रजातांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था की गरिमा का सम्मान अवश्य करें।

हिसार और सिरसा में ज्यादा विरोध क्यों

बीजेपी ने रणजीत सिंह चौटाला को हिसार लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है, जबकि सिरसा से अशोक तंवर को चुनावी मैदान में उतारा गया है। किसान आंदोलन 2 के समय हिसार में सबसे ज्यादा किसान विरोध में सामने आ गए थे। खाप पंचायतों ने भी ऐलान कर दिया था कि अगर किसानों की मांग पूरी नहीं होती तो प्रदेश भर की खाप पंचायतों साथ आ जाएंगी। हालांकि लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही खाप पंचायतों ने कहा था कि यह आंदोलन स्थगित किया जा रहा है और आने वाली नई सरकार के समक्ष अपनी मांग रखी जाएगी।

अब बीजेपी-जेजेपी का हो रहा विरोध

खाप पंचायतों और किसानों ने भले ही किसान आंदोलन स्थगित कर दिया, लेकिन बीजेपी और जेजेपी का विरोध करने की रणनीति बनाई गई थी। इसी के मद्देनजर न केवल हिसार बल्कि सिरसा समेत किसान आंदोलन प्रभावित जिलों में बीजेपी और जेजेपी नेताओं को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बीते दिन यानी शुक्रवार को पूर्व सीएम मनोहर लाल को भी विरोध का सामना करना पड़ सकता था। उन्हें हिसार के बरवाला में विजय संकल्प रैली को संबोधित करने जाना था। कई लोग काले झंडे लेकर रैली स्थल के लिए निकल गए। हालांकि पुलिस ने वक्त रहते ही प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। 

रणजीत चौटाला और अशोक तंवर का हो रहा विरोध

इसी तरह इससे पहले रणजीत चौटाला को भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। रणजीत चौटाला ने लोगों को समझाने का प्रयास किया कि इस एरिया से सांसद बृजेंद्र सिंह हैं और वो उनके कार्यों पर क्या जवाब दे सकते हैं। इस पर लोग खासे नाराज हो गए थे और कहा था कि जब जवाब नहीं देना चाहते तो वोट लेने क्यों आए हो। इसी तरह की स्थिति का सामना सिरसा से बीजेपी प्रत्याशी अशोक तंवर को झेलनी पड़ रही है। 

दुष्यंत चौटाला भी निशाने पर

इसी प्रकार, पूर्व डिप्टी सीएम और जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला को भी विरोध का सामना करना पड़ा था। इसे लेकर उनकी मां नैना चौटाला ने कहा था कि दुष्यंत का विरोध करने वाले किसान नहीं बल्कि विरोधियों के लोग हैं। दुष्यंत न तो दबेगा न डरेगा। हालांकि इस विरोध के बाद नैना चौटाला के सुर बदल गए और बीजेपी पर ठिकरा फोड़ दिया। उन्होंने चार दिन पहले भिवानी के एक कार्यक्रम में कहा कि चने के साथ घुन पिसता है। उन्होंने कहा कि दुष्यंत न तो कृषि मंत्री थे और न ही केंद्र में मंत्री थे। इसलिए किसानों को उनका विरोध नहीं करना चाहिए।  

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