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Jakhal: शहर सहित पूरे क्षेत्र में शराब ठेकों की नीलामी अभी नहीं हो पाई है, जबकि 12 जून से शराब ठेकों का नया सेशन शुरू हो चुका है। आबकारी विभाग का दावा हैं कि बीते दिन रेट कम कर ई-ऑक्शन के तहत शराब ठेक के टेंडर डाले गए हैं, जबकि ठेकेदारों का कहना है कि विभाग द्वारा शराब ठेकों के बढ़ाए गए रिजर्व प्राइज के चलते शराब की ई-ऑक्शन के लिए यहां ठेकेदारों ने नीलामी में भाग नहीं लिया, जिस कारण जाखल व इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में अभी भी शराब के ठेके नहीं बिक सके। प्रदेश सरकार ने बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष शराब के ठेकों के जोन में 7 प्रतिशत टेंडर अमाउंट में वृद्धि कर दी है, जिसके कारण ठेकेदार पीछे हट रहे है।

अब विभाग को कम करने होंगे रेट

शराब ठेकों की नीलामी में सबसे ज्यादा दिक्कत जाखल क्षेत्र में आ रही है। यहां के ठेकों की नीलामी के लिए अब विभाग को रेट और कम करने होंगे। बता दें कि जहां आबकारी विभाग द्वारा निर्धारित रेट से रेट कम करने के बाद ई-ऑक्शन पर भी कोई ठेकेदार लेने को तैयार नहीं हुआ हैं। विभाग इनकी नीलामी इस सप्ताह एक बार फिर करेगा। ई-ऑक्शन में भी ठेकों की नीलामी न होने के चलते विभाग को ठेकों के रेट कम करने पड़े हैं। फतेहाबाद में आबकारी विभाग ने 30 मई को ठेकों की ई-ऑक्शन प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें नीलामी नहीं हो सकी। इसके बाद 10, 14 जून के बाद अब 18 जून को निर्धारित रेट से कम करके भी ई-ऑक्शन की गई, लेकिन इसके बावजूद भी ठेकों की नीलामी नहीं हो पाई हैं।

निर्धारित टेंडर रेट से डिस्काउंट मिले तो सिरे चढ़ेगी नीलामी प्रक्रिया

जाखल में शराब ठेकेदारों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में महंगी शराब बिक सकती है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लोग महंगी शराब नहीं खरीद पाते। जाखल खुद बड़ा शहर न होने के चलते यहां शराब की बिक्री शहरों की अपेक्षा कम होती है अथवा इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में शराब महंगी नहीं बिक सकती। ऊपर से सरकार ने अनाप-शनाप रिजर्व प्राइज बढ़ा दिए। इसके अलावा शराब कंपनियों ने भी रेट बढ़ा दिए हैं। इससे शराब दुकान का खर्च निकालकर ठेकेदार को कुछ नहीं बचता। बता दें कि इस बार 7 प्रतिशत रिजर्व प्राइस बढ़ा दिए हैं। इससे शराब ठेकों की नीलामी न होने से जाखल क्षेत्र में शराब की दुकानें बंद पड़ी हुई है। कयास लगाए जा रहें हैं कि आबकारी विभाग पुन ई ऑक्शन से शराब ठेकों के निर्धारित टेंडर रेट में और कटौती करेगा।

राजस्व का हो रहा नुकसान

पंजाब के साथ सटे हुए जाखल क्षेत्र में ठेकेदारों का शराब ठेके लेने में दिलचस्पी न लेने का कारण पंजाब में शराब के रेट हरियाणा की अपेक्षा कम होना भी बताया गया है। ऐसे में यहां टेंडर न होने से जाखल व इसके तहत अटैच ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी शराब की दुकानें बंद पड़ी हैं। इससे जाखल के समीप स्थित पंजाब क्षेत्र से अवैध शराब बिक्री भी बढ़ गई है। जिसका खामियाजा हरियाणा के आबकारी विभाग को भुगतना पड़ रहा हैं। शराब ठेकों की नीलामी न होने से आबकारी विभाग को राजस्व की क्षति हो रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी

फतेहाबाद आबकारी विभाग के जिला अधिकारी केएल वर्मा ने बताया कि मंगलवार को जाखल जोन सहित पूरे हरियाणा के शेष बचे शराब ठेकों का ऑनलाइन कम रेट में टेंडर किया गया था, परंतु इसमें भी किसी भी ठेकेदार द्वारा भाग नहीं लिया गया है। अब दोबारा ठेकों की नीलामी हेतु इसी सप्ताह फिर से ऑनलाइन टेंडर जारी किया जाएगा।