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Jind: सफीदों की हांसी ब्रांच नहर में नहाते समय डूबे युवक शुभम का 72 घंटे के बाद सफीदों से 10 किलोमीटर दूर गांव छाप्पर के पास नहर में शव तैरता हुआ मिला। सूचना पाकर सिटी पुलिस व परिजन मौके पर पहुंचे और शव को नहर से बाहर निकाला। परिजनों ने मौके पर जाकर शव की शिनाख्त की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर नगर के नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले में जांच पड़ताल कर रही है।

नहाने के लिए नहर में उतरा था युवक

गौरतलब है कि आदर्श कालोनी सफीदों निवासी शुभम उर्फ बच्ची रविवार को नहर में नहाने के लिए कूद गया और कुछ ही देर में पानी के आगोश में समा गया। शुभम गाड़ियों के साथ काम पर जाया करता था। सुबह को वह घर से यह कह कर गया कि वह गाड़ी के साथ सरहिंद जा रहा है लेकिन वह गाड़ी पर जाने की बजाए नहर पर नहाने के लिए पहुंच गया। काफी खोजबीन के बाद भी शुभम नहीं मिला। पीछे से नहर में पानी कम करवा कर स्थानीय लोगों सहित गोताखोर परगट सिंह ने करनाल से पहुंचकर नहर में बड़ा सर्च अभियान चलाया, लेकिन शुभम का कुछ भी अता पता नहीं चल पाया।

गांव छाप्पर के पास पानी में तैर रहा था शव

मंगलवार सुबह गांव छाप्पर के नजदीक से कोई राहगीर नहर की पटरी-पटरी आ रहा था। उसने देखा कि नहर में एक लाश तैरती हुई जा रही है। रास्ते में उसको शुभम के परिजन मिल गए और उसने इसकी जानकारी उनको दी। परिजन भी राहगीर द्वारा बताए गए स्थान पर पहुंचे। मामले की सूचना सफीदों पुलिस को दी गई। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नहर से बाहर निकलवाया। शव बाहर निकालने के बाद परिजनों ने उसकी शिनाख्त कर ली। अपने बेटे का शव देखकर उसके माता-पिता व अन्य रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल था। इस मौके पर काफी तादाद में गांव छाप्पर के ग्रामीण व महिलाएं जुट गई। ग्रामीणों ने माता-पिता व रिश्तेदारों को ढांढस बंधाया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर सफीदों के नागरिक अस्पताल में रखवाया और उसका पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया।

सफीदों में होना चाहिए गोताखोर

मृतक के भाई विकास ने कहा कि सफीदों में कोई गोताखोर नहीं है। प्रशासन ने हमें अपने खर्च पर गोताखोर बुलाने के लिए कहा। जब हमने गोताखोरों से बात की तो उन्होंने 10 हजार रुपए की डिमांड की, लेकिन गरीब होने के कारण उनके पास गोताखोर बुलाने के लिए पैसे नहीं थे। उनके किसी रिश्तेदार ने करनाल से गोताखोर प्रगट सिंह को बुलाया और प्रगट सिंह ने उनसे मात्र आने-जाने का खर्चा लिया। वह नहरी विभाग के अधिकारियों के पास भी गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। विकास का कहना है कि वे गरीब थे इसी कारण उन्हें यह सबकुछ सहना पड़ा। अगर कोई बड़ा आदमी व पैसे वाला होता तो पीछे से नहर भी एकदम से बंद हो जाती और बड़े से बडे़ गोताखोर यहां पर पहुंच जाते।